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आईआईटी के नए मानक पर उबल पड़े माया-नीतीश

आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए 2011 से पात्रता की शर्तों को 12वीं कक्षा में 80 से 85 प्रतिशत अंक किए जाने को लेकर मानव संसाधान विकास मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए बयान को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वगोर्ं के छात्रों के लिए भेदभाव वाला और अविवेकपूर्ण बताया तो आईआईटी कानपुर से छात्रों और शिक्षकों ने भी इसे अनुचित करार दिया।

नीतीश ने सिब्बल को मंगलवार को इस संबंध में एक पत्र लिखकर कहा है कि आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए वर्तमान में मौजूद पात्रता में किसी भी तरह का बदलाव अनुचित होगा और इसके दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि पात्रता शर्तो में लाए जाने वाले बदलाव से 12वीं कक्षा में कम अंक पाने वाले छात्र उक्त परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। नीतीश ने कहा है कि इसे लागू किए जाने से विशिष्ट वर्ग के छात्रों को लाभ पहुंचेगा और देश के पिछड़े इलाकों के छात्र वंचित हो जाएंगे। उन्होने कहा कि आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए वर्तमान में लागू मापदंड के कारण सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वगोर्ं के छात्र शामिल हो पा रहे हैं और परीक्षा में इन पिछड़े इलाकों के छात्रों के बेहतर प्रदर्शन से भी परिलक्षित होता है।

मायावती ने सिब्बल को भेजे अपने पत्र में इस निर्णय को छात्र विरोधी करार देते हुए कहा है कि इससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। इस तरह का निर्णय वही सरकार ले सकती है जिसका आम आदमी से कोई लेना-देना नही है। मायावती ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि केन्द्र सरकार इस प्रकार का अवरोध पैदा कर आखिर किसका भला करना चाहती है। उन्होंने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके इस निर्णय से साधन सम्पन्न वर्ग के छात्रों को काफी फायदा पहुंचेगा, जबकि समाज का गरीब और साधनहीन तबका आईआईटी में प्रवेश के अवसरों से वंचित हो जाएगा।

आईआईटी कानपुर के शिक्षकों और छात्रों ने सिब्बल के बयान का विरोध करते हुए कहा कि जब तक देश भर में इंटर परीक्षा के मानक एक नहीं हो जाते, यह विचार भेदभाव पूर्ण साबित होगा। केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे चन्द्रशेखर ने कहा कि केन्द्र सरकार की यह योजना उन छात्रों के लिए बहुत गलत साबित होगी जो किसी राज्य के बोर्ड से इंटर की परीक्षा पास करते है क्योंकि चाहे उत्तर प्रदेश बोर्ड हो या बिहार बोर्ड यहां इंटर में 80 प्रतिशत नंबर लाना काफी कठिन है जबकि आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास करना आसान है। स्टूडेंट यूूनियन आईआईटी जिमखाना के पूर्व अध्यक्ष और बीटेक छात्र मोहित जॉली कहते हैं कि क्या सरकार चाहती है कि सीबीएसई और आईसीएससी बोर्ड से इंटर पास करने वाले छात्र ही आईआईटी में सेलेक्शन पाएं और वही आईआईटी जैसी उच्च शिक्षा ग्रहण करें और अन्य बोर्ड से पढ़ने वाले छात्र वंचित रह जायें। बीटेक कर चुके ओमेन्द्र भारत कहते हैं कि इस तरह का विचार ही कैसे आया। केन्द्र सरकार अगर इस विचार को लागू कर देती है तो मां-बाप अपने बच्चों को यूपी बोर्ड या किसी अन्य राज्य के बोर्ड में पढ़ाना ही बंद कर देंगे वह अपने बच्चों को सीबीएसई और आईसीएससी बोर्ड में ही पढ़ाएंगे।

संस्थान के रजिस्ट्रार संजीव कशालकर ने कहा कि जहां तक हमारा अपना विचार है तो हम यह चाहते हैं कि पहले देश में इंटर परीक्षा के लिए एक समान बोर्ड बनाने की बात हो उसके बाद इस तरह के किसी विचार को अमल में लाया जाए।

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