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आईआईटी-जेईई एंट्रेस मामले में बैकफुट पर कपिल सिब्बल

आईआईटी-जेईई एंट्रेस मामले में बैकफुट पर कपिल सिब्बल

आईआईटी-जेईई एंट्रेस परीक्षा के लिए बारहवीं में 80-85 फीसदी अंक सीमा के प्रस्ताव पर मचे बवाल के बाद मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने अपनी जोरदार सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि एचआरडी मिनिस्ट्री ने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं किया है और न ही परीक्षा के नियम तय करना मंत्रालय का काम है।

बकौल सिब्बल एक्सपर्ट कमेटी इस बारे में अपनी सिफारिशें जनवरी 2010 में देगी जिस पर सभी पक्षों की राय जानने के बाद फैसला लिया जाएगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पत्र के जवाब में भी सिब्बल ने यही बातें कही हैं। सिब्बल की यह सफाई महज तकनीकी है और प्रवेश परीक्षा के नियम क्या होंगे इस मुद्दे पर कमेटी काम कर रही है। इसलिए सिब्बल के इस बयान के बावजूद उत्तर प्रदेश और बिहार के बच्चों को राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

मीडिया पर बिफरे सिब्बल ने कहा कि उन्होंने यह कभी भी नहीं कहा कि यह प्रस्ताव मंत्रलय का है। मैंने तो किसी संवाददाता के प्रश्न के उत्तर में सिर्फ इतना कहा था कि प्रवेश के लिए अंक सीमा 89-85 फीसदी भी हो सकती है। लेकिन यह फैसला विशेषज्ञों को करना है। उन्होंने कहा कि आईआईटी में बेस्ट ब्रेन को आकर्षित करने के लिए बनी चेंडी कमेटी ने भी अपनी सिफारिशों में इस बात पर चिंता जताई थी कि कोचिंग से स्टुडेंट आईआईटी में निकल रहे हैं।

आला दिमाग के स्टुडेंट नहीं पहुच पा रहे हैं। उसने प्रवेश के लिए अंक सीमा को मौजूदा 60 फीसदी से बढ़ाने की सिफारिश की थी। इस पर फैसले के लिए पुन एक एक्सपर्ट कमेटी बनी है। बेस्ट ब्रेन कैसे आईआईटी में पहुचें, इसके लिए और भी कई उपाय हो सकते हैं। संभव है कमेटी और कोई उपाय सुझाए।

उधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी पत्र लिखकर सिब्बल ने कहा है कि सरकार अपनी तरफ से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं कर रही है। बाकी आईआईटी, आईआईएम, विश्वविद्यालय प्रवेश के नियम बनाने के लिए स्वतंत्र हैं। मंत्रलय इसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई दखल नहीं देगा।

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