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सबको हुई बिहार की चिन्ता

पटना में मंगलवार को आयोजित ‘हिन्दुस्तान समागम’ में जुटी हस्तियों में इस बात पर सहमति बनी कि राज्य के विकास के लिए राजनीतिक और व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर साझा अभियान चलाएंगे। सबने यह भी माना कि केंद्र सरकार बिहार के साथ लगातार भेदभाव करती रही है। वजह यह है कि राज्य के सांसद लॉबी बनाकर केंद्र पर दवाब नहीं बना पाते। वे आपस में ही उलङो रहते हैं।

समागम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद, फिल्म अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. शकील अहमद ,सांसद शिवानंद तिवारी, भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, प्रसिद्ध गांधीवादी चिन्तक रजी अहमद, पूर्व विदेश सचिव मुचकुंद दुबे और डीजीपी आनंद शंकर ने अपनी राय रखी। समागम का विषय था ‘बिहार 2020: दशा-दिशा’।


बेशक मुख्य मुद्दा विकास ही रहा। आम राय यह भी बनी कि बिहार का विकास होगा तभी  2020 तक भारत विकसित देशों की कतार में शामिल हो सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि न्याय के साथ विकास ही उनक लक्ष्य है। हम इस तरह के विकास के पक्षधर नहीं हैं जिसमें कुछ लोगों का विकास हो और समाज का बड़ा हिस्सा उससे वंचित रह जाए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे विकास के मुद्दे पर अपनी एकजुटता प्रदर्शित करें। श्री कुमार ने कहा कि उनका लक्ष्य बिहार को 2015 तक विकसित राज्य बनाना है। हम इस लक्ष्य को हासिल करेंगे। हम यह नहीं जानते हैं कि राज्य में जो बदलाव हो रहा है उसके बारे में राजनीतिक दल क्या सोचते हैं। देखना यह है कि आम आदमी बदलाव के बारे में क्या सोचता है। बदलाव हो रहा है। पहले पटना में कहीं-कहीं लड़कियां साइकिल से स्कूल जाती थीं। आज गांवों में लड़कियां साइकिल से स्कूल जा रही हैं। यह बड़ा बदलाव है। महिलाएं जन प्रतिनिधि की भूमिका में आगे बढ़ रही हैं।


राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद समागम में पूरे रौ में थे। उन्होंने यह कहकर सबको हैरत में डाल दिया कि केंद्र की कोई भी सरकार बिहार के साथ न्याय नहीं कर पाई। उन्होंने अपनी ओर से यह पेशकश भी कि अगर राज्य के विकास के लिए कोई गैर-राजनीतिक फोरम बनता है तो वे पूरी ताकत से साथ देंगे। उन्होंने कहा कि कुदरत ने एकीकृत बिहार को सबकुछ दिया था। उत्तर में उपजाऊ जमीन थी तो दक्षिण में खनिज का भंडार था। झारखंड अलग हुआ। अब राज्य में नक्सलवाद की समस्या सबसे जटिल है। कई इलाके ऐसे हैँ जहां जाने में उन्हें भी डर लगता है। अगर सरकार निमंत्रण दे तो वे नक्सलवाद की समस्या के निदान के लिए अपनी ओर से कोशिश करेंगे। राजद अध्यक्ष ने कहा कि नक्सलवाद का विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल में है और बिहार उसे भुगत रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र पर दबाव बनाने के लिए वे तैयार हैं। हम मानते हैं कि सबसे कम निवेश बिहार में हुआ। श्री प्रसाद ने कहा कि बिहार आज इस देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। हम उपभोक्ता हैं। सभी खराब सामान बिहार के बाजार में ठेल दिया जाता है। राज्य में उत्पादन नहीं हो रहा है। सड़क का निर्माण, बिजली उत्पादन और अपराध उन्मूलन बिहार के सामने ये तीन यक्ष प्रश्न हैं।


कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डा. शकील अहमद ने इस आरोप को खारिज किया कि राज्य के विकास में केंद्र की नकारारात्मक भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 1967 तक केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकारें थीं। उस दौर में कई कल कारखाने स्थापित हुए। राज्य की हालत 1967 के बाद ही खराब हुई। उनका इशारा गैर-कांग्रेसी सरकारों की ओर था। उन्होंने कहा कि जिम्मेवार लोग अपना स्वार्थ छोड़ें और सबकी भलाई में अपनी भलाई देखें तो राज्य का विकास होगा। भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि कोई भी अच्छा काम करे हम उसकी तारीफ करते हैं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह के कामकाज की तारीफ करते हैं। उन्होंने इसबात पर अफसोस जाहिर किया कि लोग अपने लाभ के लिए जातीय तनाव पैदा करते हैं। सत्ता का काम मंदिर मस्जिद का निर्माण करना नहीं है। सत्ता का मुख्य धर्म मानवता का विकास करना है। भाजपा सांसद ने विकास के मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामकाज की तारीफ की। लेकिन इस बात पर नाराजगी भी जाहिर की कि विकास की योजनाएं समय पर पूरी नहीं होती है और इसके चलते योजनाओं का खर्च बढ़ जाता है। भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार विकास की बात करती है मगर किसान उसके एजेंडा में नहीं है।

राज्य सरकार में भूमि सुधार लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं है। झारखंड के अलग होने के  बाद बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की  मांग हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा कि जिस वक्त वे केंद्र में मंत्री थे, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उन्होंने क्यों नहीं उठाई। आज बिहार स्थित बैंकों में 24 हजार करोड़ रुपया जमा है। आखिर क्यों नहीं इस राशि को बिहार में निवेश कराने की कोशिश हो रही है। नन बैंकिंग कंपनियां बिहार से रुपया लेकर फरार हो जाती हैं। उनपर कार्रवाई नहीं होती है। जदयू के सांसद शिवानंद तिवारी ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद पर सीधा आरोप लगाया कि उन्हें जनता ने सबसे अधिक ताकत दी थी। मगर वे उसका सदुपयोग नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि आर्थिक समृद्धि के लिए सामाजिक न्याय के सभी मोर्चे को एक मंच पर आना होगा। प्रसिद्ध गांधीवादी रजी अहमद ने कहा कि गैर बराबरी पर आधारित विकास से समाज को कोई लाभ नहीं होगा।

नक्सवाद और आतंकवाद गैर-बराबरी की ही देन हैं। यह संभव नहीं है कि एक तरफ अट्टालिकाएं हों और दूसरी तरफ झाेपड़पट्टी। झोपड़पट्टी के लोग संपन्न लोगों को भला चैन से कैसे जीने देंगे। उन्होंने कहा कि फौजी कार्रवाई से नक्सल समस्या का निदान नहीं किया जा सकता है। पूर्व विदेश सचिव मुचकुंद दुबे ने कहा कि राज्य में नक्सली समस्या का निदान जरूरी है। श्री दुबे ने कहा कि उन्होंने समान स्कूल आयोग की सिफारिशें सौंप दी थी। मगर पता नहीं उस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हो रही है। प्रारंभ में हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने हिन्दुस्तान समागम के उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आनेवाले दिनों में ग्लोबल विलेज बनेंगे और इसमें बिहार को अपनी जगह तलाशनी होगी। यह समागम इसी यात्रा की शुरुआत है। हिन्दुस्तान के वाइस प्रेसीडेंट (बिहार-झारखंड) वाईसी अग्रवाल ने बुके एवं मोमेंटो देकर आगत अतिथियों का स्वागत किया। आईबीएन-7 के संपादक आशुतोष ने समारोह का संचालन किया। हिन्दुस्तान के स्थानीय संपादक अकु श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञानप किया।

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