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बेनतीजा रही अटाली में दोनों समुदायों की पंचायत

 गांव अटाली में दो समुदायों के बीच हुए संघर्ष के तीन दिन बाद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इसे देखते हुए मंगलवार को भी गांव पुलिस छावनी बना रहा। इस बीच दोनों समुदायों के बीच पंचायत कराकर मामला सुलझाने का प्रयास किया गया, पर बात नहीं बनी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक ही समुदाय के दर्जनभर से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार दोपहर गांव के सरकारी स्कूल में दोनों समुदाय के लोग पंचायत में इक्टठे हुए। इस दौरान एसडीएम अनिल मलिक, डीसीपी रिसाल सिंह, एसीपी बदन सिंह राणा, महेंद्र सिंह आदि भी मौजूद थे। करीब एक घंटे चली पंचायत में विवाद अंजाम तक नहीं पहुंच पाया। पंचायत से एक विशेष समुदाय के मुअज्जि लोग गायब रहे, इससे पंचायत बेनतीजा रही। काफी इंतजार के बाद अधिकारी भी लौट गए। स्थिति तनावपूर्ण होने के चलते गांव में पुलिस बल डेरा डाले हुए है।
इधर, पुलिस ने गांव के नंबरदार इशाक के बयान पर सबसुख, बच्चू, सुरेंद्र, हरगोबिंद, बल्ले, श्रवण, लाखा, मुनीम, जसवंत, होशियार, पूरन, जोगिंद्र, सतीश व उनके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन विशेष समुदाय को पूरी सहायता देने को तैयार है। इसके बावजूद वे सहयोग नहीं कर रहे।
उधर, इस समुदाय के प्रमुख लोगों का कहना है कि पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। झगड़े के पहले ही दिन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाता, तो बात इतनी नहीं बढ़ती। इस दौरान हमलावरों के हौसले बुलंद रहे और उनका हमला जारी रहा। आज भी उन्हें व उनके परिजनों पर जानलेवा हमला होने का खतरा बना हुआ है। इस वजह से उन्होंने परिवार के लोगों को सुरक्षित अपने रिश्तेदारों के यहां पहुंचा दिया।
जबकि दूसरे समुदाय के लोगों का आरोप है कि समुदाय विशेष के लोग झगड़े को तूल दे रहे हैं।

वोटो की राजनीति के चलते हुआ संघर्ष--
गांव अटाली में दो समुदायों के बीच हुआ संघर्ष वोटों की राजनीति का परिणाम है। करीब छह माह बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव होने हैं। इसके चलते अटाली में कुछ खद्दरधारी नेता अचानक सक्रिय हो गए हैं। पंचायत चुनाव के लिए एक समुदाय विशेष के लोगों का दिल जीतने के लिए, उन्हें कुछ माह पूर्व धार्मिक स्थल बनाने की सलाह दे दी। गांव के दूसरे समुदाय के लोग इसके पक्ष में नहीं हैं। उनका आरोप है कि जिस जमीन पर धार्मिक स्थल बन रहा है, वह पंचायत की है। जबकि दूसरा पक्ष जमीन को खानदानी बता रहा है।
तीन माह पहले जब धार्मिक स्थल के निर्माण का कार्य शुरू हुआ, तभी इसके विरोध में दूसरा पक्ष अदालत पहुंच गया। कोर्ट ने फैसला आने तक स्थगन आदेश दे रखा है। इसमें एक तारीख लग चुकी है। दूसरी तारीख 27 अक्तूबर है। अदालती आदेश के बाद दोनों समुदायों के दिलों में खटास और बढ़ गई है।

अंग्रेजों के जमाने से उनके रिश्ते रहे हैं सौहार्दपूर्ण--
अंग्रेजी हुकूमत के जमाने से एक-दूसरे के सुख-दुख में शरीक होने वाले दोनों समुदायों के रिश्ते में एकाएक खटास पैदा हुई है। अब से पहले दोनों एक दूसरे की खुशी-गम में शरीक होते रहे हैं। गांव में कभी ऐसी कोई घटना नहीं हुई, जिससे तनावपूर्ण स्थिति बने।
एक समुदाय विशेष के लोगों का मानना है कि उनके बीच मुखालफत के बीज एक समुदाय के कुछ लोगों ने जान-बूझकर डाले हैं। जबकि दूसरे समुदाय के लोगों का कहना है कि इन्हें बसाने वाले उनके पूर्वज थे। गांव के उत्थान में दोनों ने बराबर का सहयोग दिया। दिलों में खटास कुछ महीने पहले से हुई है, जिसे खत्म कराने का प्रयास जारी है।

 

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