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जगो सरकार जगो

सरकार के लिए अब कमर कसने का समय आ गया है। विश्व में मंदी का संकट छाया है, उसके ऊपर इस साल मानसून भी दगा दे गया। पूरे देश को सूखे का सामना अलग से करना पड़ रहा है यानी संकट पर संकट। वित्त मंत्री प्रणव दा ने कहा है कि पूरे भारत में 161 जिले सूखे से प्रभावित हैं, जिससे फसल की बुआई पर काफी बुरा असर पड़ा है। हालांकि केंद्र सरकार कह रही है कि मानसून ठीक होने से देश में अनाज की कमी नहीं है। अनाज की कमी होगी तो उसे पूरा किया जायेगा, किसी को भूख से मरने नहीं दिया जायेगा। सरकार को बाजार की उन ताकतों से कठोर ढंग से निबटना होगा जो कालाबाजारी और जमाखोरी करती हैं। बाजार में फल, सब्जी, चीनी, दाल, अनाज के भाव पहले से ही आसमान छू रहे हैं और अब वे कम बारिश होने का तर्क देकर इन चीजों के मनमाने दाम ले रहे हैं, इसलिए सरकार को रोजमर्रा की वस्तुओं के मूल्यों पर नियंत्रण रखना होगा। अगर आगे भी मानसून कमजोर रहा तो पीने का पानी, बिजली और पशु चारे का भारी संकट हो सकता है, इसलिए सरकार वक्त रहते कुछ योजना बनाकर जितनी जल्दी हो सके इसका समाधान ढूंढ़े।
जयन्ती प्रसाद उनियाल, ऋषिकेश

असमानता की खाई
आज हमारे देश में विकास की बात की जा रही है, लेकिन इसका फायदा मुट्ठी भर लोगों को ही मिल रहा है। अधिकतर जनता के पास जो था वह भी छिनता जा रहा है। एक ओर अंधाधुंध पैसा राजनीतिक समारोहों पर खर्च किया जा रहा है, दूसरी तरफ एक बड़ी जनसंख्या को भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा है। कहीं चमचमाती सड़कें एवं कारें हैं तो कहीं नाली और खडं़जा भी नहीं। कई गांवों में तो आवागमन के साधन भी नहीं हैं। कोई ज्यादा खाने की वजह से मोटापे का इलाज करा रहा है तो कोई भूख, कुपोषण और बीमारी से बिना इलाज के मर रहा है। कहीं रातों में सूरज को भी मात करने वाली रोशनी, पानी के फव्वारे और झरने हैं तो कहीं उजाले और पानी को तरसते लोग। विकास का फायदा इन लोगों को मिले तभी सही मायनों में विकास है।
ठाकुर सिंह नेगी, मास कॉम, देहरादून

स्वास्थ्य सेवा की हालत खराब
उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत दयनीय है। पहाड़ों में अनेक अस्पतालों में सालों से डॉक्टर नहीं हैं और कहीं अस्पताल ही नहीं हैं। गांवों से बीमार लोगों को कण्डी या डोली में निकट के स्वास्थ्य केंद्र लाना पड़ता है। गंभीर रोगियों को महानगरों की तरफ रुख करना पड़ता है। पहाड़ में छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में न्यूरोसजर्न न होने के कारण लोगों को बड़ी परेशानी होती है। अक्सर गांवों की दूरी सड़कों से ज्यादा होने के कारण लोग बीमारों को समय से नहीं दिखा पाते है जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। महिलाओं की स्थिति और भी दयनीय है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आज भी तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक व जादू-टोने के सहारे जीते हैं, जिससे कभी-कभी उनको लेने के देने पड़ जाते हैं। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर इमारतों, भवनों का खूब निर्माण हुआ, लेकिन चिकित्साधिकारियों व अन्य कर्मचारियों के पद रिक्त होने से यह इमारतें सूनी रहती हैं। राज्य के मुखिया स्वास्थ्य विभाग भी देखते हैं इसलिए वे इस पर भी ध्यान दें।
धीरज भट्ट, हल्द्वानी, नैनीताल

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