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मजिस्ट्रेट ही करेंगे अस्थाना की मौत की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पीएफ घोटाले के मुख्य अभियुक्त आशुतोष अस्थाना की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत की जांच विशेष टीम से करवाने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार (सीआरपीसी की धारा-176) हिरासत में मरे व्यक्ति की जांच मजिस्ट्रेट करते हैं, इसलिए इस मामले में भी जांच मजिस्ट्रेट करेंगे और आठ हफ्ते में रिपोर्ट शीर्ष अदालत में पेश करेंगे। यदि कोर्ट इस जांच से संतुष्ट नहीं हुआ, तो अन्य जांच का आदेश दिया जाएगा।


जस्टिस डीके जैन, एके गांगुली तथा वीएस सिरपुरकर की विशेष पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया, कि इस केस के सभी अभियुक्तों और गवाहों को पूर्ण सुरक्षा दे। कोर्ट ने जमानत पर छूटे एक अभियुक्त अनोखेलाल बढ़ई को सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। सीबीआई से कहा गया है कि वह अस्थाना के विसरा सेंपल लेकर, उसकी जांच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में करवाए।


सुनवाई के दौरान गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने मांग की, कि इस मामले की जांच विशेष जांच टीम से करवाई जाए, ताकि न्यायपालिका में जनता का विश्वास बना रहे, क्योंकि इस मामले में अनेक जजों के नाम सामने आए हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है, जांच सहीं चल रही है और उसे निचली अदालतों के जजों पर पूरा विश्वास है।


उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल एसके द्विवेदी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सरकार सीबीआई को पूरा सहयोग देगी और विसरा के सेंपल उसे मुहैया करवा दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट अस्थाना की मौत की जांच भी सीबीआई से करवाने का आदेश देता है, तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी। सुनवाई के दौरान गाजियाबाद के एसएसपी भी कोर्ट में मौजूद थे।


गौरतलब है कि अस्थाना (43) ने ही कोर्ट में बयान देकर घोटाले में हाईकोर्ट और निचली अदालतों के 32 जजों के नाम का खुलासा किया था। उसने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक जज का भी नाम लिया था। 17 अक्तूबर को डासना की जिला जेल में उसकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में बताया था, कि अस्थाना की मौत जहर से हुई है, लेकिन जहर उसने स्वयं खाया या उसे दिया गया, यह जांच के बाद ही पता चलेगा।
अस्थाना गाजियाबाद जिला अदालत में सेंट्रल नाजिर थे। न्यायिक अधिकारियों के निर्देश पर अस्थाना के हस्ताक्षरों से ही जिला कोषागार में कर्मचारियों के पीएफ खातों से सात करोड़ रुपये से अधिक की निकासी हुई थी। उन्हें अप्रैल 2008 में गिरफ्तार किया गया था।

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