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दहेज की आग में एक और विवाहिता प्रताडि़त

दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता पर मिट्टी तेल डाल कर जलाने के बाद उसे 15 दिन तक घर में बंद ही नहीं रखा बल्कि बैल्टों और लात-घूसों से पीटा भी गया। 15 दिन बाद बंद घर से जब घायल विवाहिता की करहाने की आवास पड़ोसियों ने सुनी तो उसके परिजनों को सूचित किया गया। परिजन उसे देहरादून ले आए और अस्पताल में दाखिल कराया। कैंट थाने में पति समेत तीन लोगों के खिलाफ  पुलिस में युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

पांच दिसंबर 2007 को गोविंद गढ़, देहरादून की रहने वाली नेहा पुत्री राजेश का विवाह बड़ौत, मरेठ में रहने वाले संजय पुत्र भंवर सिंह के साथ हुआ। संजय बड़ौत में ही किसी फैक्ट्री में ट्रक चालक है। मार्च में उसने नौकरी छोड़ दी थी। पीड़िता ने बताया पिछले कुछ समय से उसके ससुरालियों ने उससे मायके से लाखों रुपये लाने को कहा जिससे उसका पति संजय गाड़ी खरीदेगा। नेहा के पिता दून में किसी दुकान में नौकरी करते हैं। नेहा ने कई बार मायके की कमजोर आर्थिक हालत का हवाला भी दिया। लेकिन उसका पति संजय, ससुर भंवर सिंह, सास निच्चो व जेठ मित्र उसको प्रताड़ित करने लगे।

इसकी शिकायत कई बार नेहा ने अपने पिता से भी की। इस पर नेहा के पिता ने उसके ससुर व पति संजय के सामने रुपये जुटाने के लिए कुछ समय देने की गुहार लगाई। इस पर ससुराल वालों ने नेहा के पिता को चार अक्टूबर तक का समय दिया। दिया समय निकलने के बाद भी जब राजेश रुपया नहीं जुटा पाया तो संजय ने नेहा के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। नेहा ने विरोध किया तो संजय व परिवार के अन्य सदस्यों ने नेहा पर मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा दी। किसी तरह युवती ने अपनी जान बचाई। रुपयों के लालच में पागल हो चुके ससुरालियों ने नेहा को झुलसी अवस्था में ही कमरे में बंद कर दिया। 15 दिन तक नेहा को कमरे में बंद रखा गया इस दौरान उसको मारा-पीटा भी गया। 18 अक्टूबर को पड़ोसियों ने बंद कमरे से नेहा की करहाने की आवाज सुनी तो दून में उसके मायके को सूचित किया। सूचना मिलते ही उसके पिता बड़ौत पहुंचे और उसे देहरादून ले आए जहां उसे दून अस्पताल में दाखिल कराया गया।

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