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ब्रेन स्ट्रोक

ब्रेन स्ट्रोक से बलिष्ठ शरीर भी कमजोर हो जाता है। इस कठिन घड़ी में पहली जरूरत धीरज और हिम्मत बनाए रखने की होती है। शुरू के कुछ घंटों में अगर मरीज को सही इलाज मिल जाए तो कभी-कभी स्ट्रोक से पूरी तरह उबरा जा सकता है। यह मुमकिन न हो, तब भी इलाज से मरीज को बहुत कुछ अपने लायक बनाया जा सकता है। पहले छह महीनों तक सुधार की गति अच्छी रहती है।

तात्कालिक उपाय
रोगी को पास के किसी बड़े अस्पताल में ले जाएं। अस्पताल पहुंचने पर क्लिनिकल परीक्षण के बाद मस्तिष्क का सी़टी़ स्कैन या एमआरआई किया जाता है। इस जांच से यह मसला सुलझ जाता है कि लकवा खून का दौरा रुकने से हुआ है या धमनी फटने से।

इलाज
मरीज के पहले 48 से 72 घंटे बहुत नाजुक होते हैं। जिन मामलों में खून का कतरा फंसने से लकवा होता है, उनमें हालत देखते हुए रक्त-जमाव रोक दवा देकर कतरे को घोलने और रक्तप्रवाह बहाल करने की कोशिश की जाती है। ऐसी दवाएं भी दी जाती हैं जिनसे मस्तिष्क की सूजन कम हो।

कोशिश यह रहती है कि मस्तिष्क का कम-से-कम नुकसान हो और जीवन के लिए जरूरी क्रियाएं सुचारू रूप से चलती रहें। सांस चलाए रखना, शरीर को समुचित मात्र में द्रव और पोषक तत्व देने के लिए नाक से प्लास्टिक की ट्यूब से द्रव रूप में आहार देना, मूत्रशय में केथेटर लगाना, मल-त्याग पर नियंत्रण न रहने की स्थिति में साफ-सफाई, समय से करवट दिलाना, पेशियों की नियमित मालिश और व्यायाम जैसी अनेक चीजों पर ध्यान देने की सख्त जरूरत होती है।  
जारी..

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