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राजकीय पुस्तकालय को मिली साहित्यिक सौगात

मशहूर साहित्यकार रामचंद्र सरोज की कालजयी रचनाएं अब गाजियाबाद के लोग भी पढ़ सकेंगे। राजकीय पुस्तकालय, नंदग्राम को सरोज की तमाम व्यंग्य, कहानी, चिंतन से जुड़ी कृतियों की सौगात मिली है। लाइब्रेरी में साहित्य की अमर किताबों की कमी होने की वजह से लोग मायूस होकर लौटते रहे हैं। एडीएम सिटी एसके श्रीवास्तव ने इसी कमी को पूरा करने के लिए पहल की है। उनके पिता रामचंद्र सरोज की गिनती हिंदी साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में होती है। साहित्य की सभी विधाएं व्यंग्य, कहानी, गंभीर चिंतन की कितनी ही कृतियां देने वाले श्री सरोज को वर्ष 2000 में साहित्य अकादमी पुरष्कार से नवाजा जा चुका है।


शहर के लोगों की मांग पर एडीएम सिटी ने मंगलवार को एक सादे समारोह में सरोज की लिखीं-आइए अंदर चलें, उल्टा टंगा प्रजातंत्र, सच-सच बताऊं उस्ताद, आर्ष चिंतन के विकल्प, धूप की चिट्ठियां, वे दिन-वे लोग, सुतुनका नामदेवदासी समेत तमाम किताबें राजकीय पुस्तकालय को भेंट कीं। इस अवसर पर पुस्तकालाध्यक्ष गीता रानी प्रमुख रूप से मौजूद थीं।

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