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केन्द्र का भेदभावपूर्ण रवैया बिहार के पिछड़ने का कारणः लालू

केन्द्र का भेदभावपूर्ण रवैया बिहार के पिछड़ने का कारणः लालू

हिन्दुस्तान समागम में ‘बिहार 2020: दशा-दिशा’ विषय पर अपनी बेलाग टिप्पणी देते हुए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने कहा कि केन्द्र सरकारों की अनदेखी और बिहारी नेताओं में एकजुटता का अभाव ही राज्य के विकास में बड़ी बाधा है। हमें लगतार यूज किया गया। हम घटिया सामनों के लिए कंज्यूमर मार्केट बनकर रह गये हैं।

केन्द्र में बनी अब तक की सभी सरकारों ने अन्य राज्यों की तुलना में बिहार की इतनी उपेक्षा की कि अब विशेष राज्य का दर्जा पाना राज्य का वाजिब हक हो गया है। लगातार पिछड़ते गये हैं और अब विशेष ध्यान दिये बिना हम बराबरी में नहीं पहुंच सकते। जड़ जमा चुकी जातिप्रथा भी कम दोषी नहीं है। उहोंने हिन्दुस्तान के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा की इसके लिए गैर राजनीतिक मंच बनाकर संघर्ष चाहिए। अगर ऐसी पहल हुई तो तो हम साथ हैं। 

समागम के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए प्रसाद ने साफ कहा कि बिहार को किसी की कृपा की जरूरत नहीं उसे सिर्फ उसका हक मिल जाये तो मेधावी और मेहनकश राज्यवासियों का काम बन जायेगा। लेकिन मुश्किल यह है कि दिल्ली में सिर्फ ताकत वालों की ही बात सुनी जाती है। दूसरे राज्यों के नेता राज्य के भीतर जो सिर फुटव्वल कर लें लेकिन दिल्ली पहुंचते ही अपने अधिकार के लिए एकजुट हो जाते हैं। इसके विपरीत हमारे यहां मुंह फुलव्वल की बीमारी बहुत बड़ी है। जरा सी किसी पर टिप्पणी कर दें तो उससे डायलॉग ही बंद हो जाता है।

केन्द्र में अब तक जितनी भी सरकारें बनीं सबने हमारी इसी कमजोरी का लाभ उठाया। भाड़ा समानीकरण की नीति बनाकर बिहार में निवेश को रोक दिया गया। नोयडा से लेकर हरियरणा तक के व्यवसायी बिहार से गजरे के भाव में लोहा खरीदकर अपने यहां कारखाने लगा लिये। जब हमारी सरकार थी तो इस मुद्दे पर हमने हंगामा किया। लाभ यह हुआ कि कुछ वस्तुओं को इससे अलग किया गया।

नक्सलवाद को भी बड़ी समस्या बताते हुए उन्होंने कहा शांति के बिना समृद्धि की कल्पना नहीं की जा सकती।  नक्सलियों से बात कर उन्हें मुख्यधारा में लाना होगा।  हिंसा का इलाज हिंसा से नहीं हो सकता। इस बहाने उन्होंने राज्य सरकार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि छोटे भाई (नीतीश कुमार) कहते हैं कि हम नक्सलियों से मिले हुए हैं। सच्चई यह है कि वे खुद ही उनसे मिलते रहे हैं। कुछ इसी प्रकार के दोषारोपणों में हम फंसे रह जाते हैं। हर आदमी अपना दोष दूसरे पर मढ़ता है। छोटे भाई बिहार मॉडल की चर्चा करते हैं। उनका मॉडल यही है कि शिक्षकों की बहाली पहले हो गई और परीक्षा बाद में ली जा रही है। सचमुच यह बिहार मॉडल ही है। किसी दूसरे राज्य में ऐसा नहीं होता।
 
प्रसाद ने ग्लोबल वार्मिग की चर्चा की तो बाढ़ और सुखाड़ के मुद्दों को भी छुआ। उन्होंने कहा कि आधी आबादी बाढ़ से परेशान रहती है। उत्तर बिहार को राज्य का बागीचा तो मध्य बिहार को धान का कटोरा कहा जाता है लेकिन प्रकृति की मार से यहां किसान परेशान रहते हैं।  दो डिग्री तापमान बढ़ने वाला है।  इसका असर हमारे उत्पादन पर पड़ेगा। सरकार को पहले सचेत होना चाहिए। जाति प्रथा तोड़ी नहीं गई तो खुद ब खुद टूट जाएगी। अब हमारे बच्चाों ने इसके खिलाफ कदम उठाना शुरू कर दिया है। इससे समग्र विकास होगा।

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