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चीनी मिलों के निजीकरण का मामला खटाई में

उत्तर प्रदेश सरकार की स्वामित्व वाली और सहकारी चीनी मिलों के निजीकरण का मामला निवेशकों की रूचि कम होने के कारण खटाई में पड़ता दिख रहा है।

राज्य सरकार ने 28 सहकारी क्षेत्र और 33 सरकारी क्षेत्र की मिलों के निजीकरण का निर्णय लिया था। इसके लिए विश्व स्तरीय निविदाएं जारी की गई थीं लेकिन इसका कोई सफल परिणाम सामने नहीं आया।

अब सरकार भी शायद यह समझ चुकी है कि इस सत्र में चीनी मिलों का निजीकरण संभव नहीं है और राज्य चीनी निगम और उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी महासंघ दोनों को मिलों की मरम्मत और देखभाल के लिए 68 करोड़ रूपए दिए हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार ने इन दोनों ईकाइयों को आगामी एक नवम्बर से गन्ना पेराई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

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