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दूसरों के बच्चों को दिशा देती सविता

दूसरों के बच्चों को दिशा देती सविता

डॉ. सविता चड्ढा भी कुछ ऐसे ही इस महत्वपूर्ण कार्य की ओर मुड़ीं। उस समय डॉ. चड्ढा के बच्चे छोटे-छोटे थे, उन्होंने देखा कि उनके बच्चे तो घरेलू और स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन आस-पड़ोस के अनेक बच्चे दिन भर हुड़दंग मचाते गलियों में घूमते हैं। सविता को चिन्ता हुई कि जब उनके आसपास का माहौल खराब होगा तो केवल उनके बच्चों के शिक्षित होने का क्या अर्थ? तब उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे अपने बच्चों के साथ-साथ दूसरे बच्चों को भी शिक्षित करेंगी और यह विचार अपने पति के सामने व्यक्त किया। पति की सहज सहमति मिलने पर शुरू हुआ सविता का यह सफर। तब सविता कुछ बच्चों को अपने घर की छत पर और कभी-कभी कमरे में बिठाकर पढ़ाया करती थीं।

उनके द्वारा पढ़ाये हुए उस समय के अनेक बच्चे आज करियर की दृष्टि से कामयाब हैं। बकौल डा. सविता चड्ढा - ‘बच्चों के साथ प्रतिदिन कुछ समय बिताकर उनके भविष्य को उज्जवल बनाने की इस चेष्टा से मुङो आंतरिक संतुष्टि मिलती है। मुङो इस काम की प्रशंसा की उतनी परवाह नहीं, जितनी अपने आसपास के बच्चों के भविष्य की है, क्योंकि आजकल बच्चों का ध्यान टीवी देखने, वीडियो गेम खेलने आदि में अधिक चला जता है। मैं चाहती हूं कि बच्चों के  इस समय का सदुपयोग कराया जए, ताकि उनमें कोई बुराई  घर न कर जाए। लेकिन उनको यह शिक्षा देते समय मैं इस बात का विशेष ध्यान रखती हूं कि कहीं मेरी इस योजना के कारण किसी बच्चे की स्कूली पढ़ाई तो प्रभावित नहीं हो रही, तो प्रत्येक दिन सबसे पहले मैं हर बच्चे से उसके स्कूल की पढ़ाई और गृह कार्य के बारे में जरूर पूछती हूं, फिर आगे अपनी कार्यवाही शुरू करती हूं। आज जब मैं अपने द्वारा पढ़ाए बच्चों को कामयाब होता देखती हूं तो मुङो बड़ी खुशी होती है। वह आगे कहती हैं कि जो बच्च पहली बार मेरे पास आता है तो मैं सबसे पहले उसके अपने  माता-पिता के बारे में उसके विचार सुनती हूं। इससे मुङो उसकी पारिवारिक रुचि और सोच का पता चल जता है। तब सबसे पहले मैं उस बच्चे को उसके माता-पिता के प्रति विनम्र और आज्ञाकारी होना सिखाती हूं, ताकि उनमें अच्छे विचार पनपें और उसके मन-मस्तिष्क की कुण्ठाओं व उग्र विचारों से बचाया ज सके। ’ यह बात सत्य है कि हमारी तरक्की तब मायने रखती है, जब हमारे बच्चे भी उतने ही संस्कारवान हों, जितने कि हम, और देश की तरक्की तभी संभव है, जब पूरे देश में लोग डॉ. सविता चड्ढा जसे समाजसेवी विचारवान और कर्मठ हों। डॉ. सविता चड्ढा के द्वारा चलाये ज रहे इस मिशन की तारीफ तो हम सब कर सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि हममें से कितने ऐसे लोग हैं, जो इसी तरह के दूसरे सामाजिक सेवा के कार्य कर रहे हैं या करने का प्रण ले चुके हैं और करेंगे? यही अहम बात है और यही सोचने की बात भी है। 

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