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चार धाम यात्रा अब अपने ढलान पर पहुंचने लगी

चार धाम यात्रा अब अपने ढलान पर पहुंचने लगी

उत्तराखंड में चार धाम तीर्थयात्रा के रूप में विख्यात यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तीर्थों की यात्रा तीन धामों के कपाट बंद होने के बाद से अब समाप्ति की ओर है।

उत्तराखंड मे लाखों की संख्या मे प्रतिवर्ष आने वाले तीर्थयात्री न केवल चार धाम की यात्रा करते हैं बल्कि हजारों की संख्या में अन्य तीर्थ स्थलों जैसे पंच केदारों मे मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रूद्रनाथ और कल्पेश्वर महादेव की भी यात्रा करते हैं। इसके अतिरिक्त अनेक लोग पंच बद्री और पंच प्रयाग के भी दर्शन करते हैं।

बद्रीनाथ केदारनाथ समिति के सूत्रों ने बताया कि अब तक करीब 30 लाख यात्रियों ने चारों धाम और पंचकेदार ,पंचबद्री और पंच प्रयाग के दर्शन किये हैं।

सूत्रों के अनुसार तीन धाम के कपाट शीतकाल के लिये बंद हो चुके हैं लेकिन सर्वोच्च तीर्थ के रूप में विख्यात बद्रीनाथ के कपाट अगले महीने की 17 तारीख को बंद होंगे।

चमोली में करीब 12 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित चतुर्थ केदार के रूप मे स्थापित भगवान रूद्रनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिये सबसे पहले दीपावली के दिन बंद कर दिये गए।

मंदिर के सूत्रों ने बताया कि वैदिक मंत्रोंच्चार के बीच सभी धार्मिक रस्मों को पूरा करने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिये गये और रूद्रनाथ की डोली को गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर मे विराजित करने के लिये रवाना किया गया जहां वह छह माह तक विराजित रहेगी । डोली के जुलूस में सैकडों की संख्या मे श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

हिमालय की गोद में दस हजार से तेरह हजार फुट की ऊंचाई पर बसे इन चारों धाम के कपाट बंद होने के साथ ही करीब छह महीने तक चलने वाली चार धाम यात्रा समाप्त होने का सिलसिला शुरू हो गया है।

चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल ने बताया कि चारों धाम के कपाट बंद होने की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी गई थी और इसके लिए विशेष अनुष्ठान तथा पूजा पाठ भी शुरू कर दिया गया था।

यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट दीपावली के तीसरे दिन यमद्वितीया के दिन बंद किये गये जबकि गंगोत्री के कपाट दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के मौके पर पूरे विधि विधान से बंद किये गये। चार धाम के अलावा पंच केदारों में शामिल मदमहेश्वर तुंगनाथ के कपाट भी अलग अलग तारीखों पर बंद किये जायेंगे।

नौटियाल ने बताया कि गंगोत्री के कपाट धार्मिक अनुष्ठान और वैदिक मंत्रों के बीच बंद कर दिये जाने के बाद गंगोत्री मां की डोली मुख्वा मारकण्डेय मंदिर में शीतकाल के दौरान करीब छह महीने के लिए भेज दी गयी।

केदार नाथ की गद्दी उखीमठ में धर्माचार्यों ने गत दिनों मुहुर्त निकालकर केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद करने की तिथि निर्धारित की थी। मुहुर्त के अनुसार केदारनाथ की गद्दी रात्रि विश्राम के लिये पहले गौरी कुंड लायी गयी और उसके बाद रामपुर, गुप्तकाशी रखी गयी है। केदारनाथ की गद्दी छह महीने के लिये उंकालेश्वर मंदिर में रखी जायेगी।

धर्माचार्यों ने द्वितीय केदार के रूप मे स्थापित मदमहेश्वर के कपाट 20 नवंबर को बंद करने का मुहुर्त निकाला है जबकि तृतीय केदार के रूप मे स्थापित तुंगनाथ के कपाट 26 नवंबर को बंद करने की घोषणा की गयी है।

परम्परा के अनुसार मदमहेश्वर की गद्दी भी कालेश्वर मंदिर लायी जायेगी जबकि तुंगनाथ की गद्दी मक्कूमठ स्थित मंदिर मे स्थापित की जायेगी।

दूसरी ओर हिन्दुओं के सर्वोच्च तीर्थ के रूप में स्थापित बद्रीनाथ धाम स्थित बद्रीनाथ मंदिर के कपाट आगामी 17 नवम्बर को छह महीने के लिए बंद कर दिये जायेंगे। मंदिर के प्रमुख पुजारी रावल केशव नम्बूदिरी की उपस्थिति में गत दिनों कपाट बंद करने की तिथि की घोषणा की जा चुकी है।

मुहूर्त के अनुसार मंदिर के कपाट 17 नवम्बर को दोपहर तीन बजकर चालीस मिनट पर बंद किये जायेंगे और बद्रीनाथ की डोली जोशी मठ स्थित मंदिर लायी जायेगी।

अब तक करीब 30 लाख लोग चारों धाम की यात्रा पूरी कर चुके हैं।

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