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योजनाएं सही ढंग से लागू हो जाएं तो बात बनें

20 अक्टूबर को आयोजित हो रहे ‘हिन्दुस्तान समागम-2009’ के तहत ‘हिन्दुस्तान’ कार्यालय पटना में गुरुवार को विमर्श के लिए व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। इस चर्चा में सूबे में कार्यसंस्कृति का अभाव, आधारभूत संरचना का अभाव, सरकार की इच्छाशक्ति और पहल, भ्रष्टाचार पर लगाम जैसे मुद्दे उभर कर सामने आए। सभी प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि अगर सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन सही ढंग से हो जाता है तो कई समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाएगी। प्रस्तुत है ‘आवाज’ की चौथी कड़ी..

इंस्पेक्टर राज खत्म हो
इंस्पेक्टर राज खत्म होगा तभी बिहार आगे बढ़ सकेगा। पूंजी का बहुत बड़ा हिस्सा इंस्पेक्टर राज चलाने वाले खा जाते हैं। सिर्फ कानून-व्यवस्था सुधरने व सड़क बन जाने से ही विकास की गाड़ी आगे नहीं बढ़ेगी। बैंकों के रवैए में भी बदलाव की सख्त जरूरत है। बैंक अधिकारी बिहार को आज भी उसी नजरिए से देख रहे हैं जैसे पहले देखते थे। सरकार भी अपनी योजनाओं को जमीन पर उतारने के मामले में पूरी गंभीर नहीं दिखती है। कागज पर योजनाएं बहुत बढ़िया बनती हैं पर जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। यहां ट्रेडिंग की बहुत संभावनाएं हैं। दो साल पहले सरकार ने पहल भी की पर जमीन की कीमत इतनी अधिक लगायी गयी कि कोई भी उद्यमी आगे नहीं आया। लोग उद्योग लगाना चाहते हैं पर सरकार की ओर से सकारात्मक कदम उठाना होगा। गांवों में योजनाओं को जमीन पर उतारने का जिम्मा स्वैच्छिक संगठनों को दिया जाए। 

-कमल नोपानी, अध्यक्ष, बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन

राजनीतिक दल एक हों
बिहार के विकास के सवाल पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुटता दिखानी होग। आम जनता को भी इन दलों के नेताओं को मजबूर करना होगा कि वे इस मुद्दे पर  पूरी तरह एकजुट हो जाएं। सूबे में सबसे बड़ी समस्या आधारभूत संरचना व जल संसाधन प्रबंधन की है। जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो तो कई समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी। जल निकासी की व्यवस्था बेहतर नहीं है। इस पर  विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हमारा दूसरा बड़ा सोर्स है मानव संसाधन का। लेकिन स्किल डेवलपमेंट की दिशा में कुछ नहीं हो रहा है।  कृषि व उस पर आधारित उद्योग पर अगर मूल्य संवर्धन हो जाए तो आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नरेगा से लोगों को काम तो मिल रहा है पर इससे उनकी कार्यकुशलता घट रही है।  

-केपीएस केशरी, बिहार  इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष

सरकार जो कहती है वह होता नहीं
नब्बे के दशक से विकास का नया युग शुरू हुआ। सभी राज्य इसके बाद आगे बढ़ते  गए पर हमारा राज्य पिछड़ता गया। मूलभूत समस्याएं आज भी वही की वहीं हैं। शिक्षा, जातिवाद, उद्योग-व्यवसाय, नक्सलवाद, नैतिक मूल्यों में ह्रास व गांवों के विकास के मामले में अधिक कुछ नहीं हो सका है। आम लोगों को सरकार की ओर से बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं करायी जा रही हैं। सन् 2005 के बाद कुछ -कुछ काम होना शुरू हुआ है। सरकार की तरफ से कई तरह की विकास की योजनाएं बनायी गयी हैं लेकिन इनको ठीक तरीके से कार्यान्वित नहीं किया जा रहा है। कानून-व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ है। लेकिन सच यह है कि आज भी लालफीताशाही हावी है। यही वजह है कि सरकार जो कहती है वह हो नहीं पाता है। सरकार को इस मसले पर दृढ़ संकल्पी होना होगा। काम करने वाली मशीनरी में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत है।

-राजेश सिकारिया, महामंत्री प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन

सरकार की मंशा साफ होनी चाहिए
उद्यमी यहां आना चाहते हैं। पॉवर सेक्टर में कई बाहर के उद्यमी यहां पूंजी लगाना चाहते हैं पर कोल लिंकेज की सबसे बड़ी समस्या है। जमीन की भी समस्या है। बिहार में बिजली की घोर कमी है। इसके अभाव में उद्योग-धंधे पनप नहीं पा रहे हैं। उद्यमी भी आना नहीं चाहते हैं। इस दिशा में सरकार को अपनी मंशा साफ करनी होगी व सकारात्मक कदम उठाना होगा। सरकार को यह तय करना होगा कि कौन सी जमीन किस उद्योग के लिए है। इसके लिए अफसरों को भी ट्रेनिंग देने की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि संबंधित क्षेत्र के एक्सपर्ट अधिकारी को ही यह जिम्मेदारी सौंपी जाए। राज्य प्रमोशन काउंसिल के समक्ष लगभग 209 प्रस्ताव आए हैं। इसमें खाद्य प्रसंस्करण, चीनी व शिक्षा में सबसे अधिक हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत सुधार की जरूरत है। हालांकि एक सर्वे के मुताबिक इस मामले में बिहार पिछले दो साल के दौरान 20 वें पायदान से 18 वें पर आ गया है। इससे उम्मीद की किरण बंधी है।

-पीके  अग्रवाल, अध्यक्ष बिहार चैम्बर ऑफ कामर्स


स्पेशल पैकेज मिले
बिहार को स्पेशल पैकेज की बहुत अधिक दरकार है। इसके बगैर बिहार आगे नहीं बढ़ सकता है। हालांकि पैकेज की मांग बहुत दिनों से उठ  रही है पर केन्द्र व राज्य के बेहतर रिश्ते नहीं रहने के कारण कुछ नहीं हो पा रहा है। पिछले चार सालों में कुछ सुधार तो हुआ है पर यह कागज पर ही अधिक चमकीला दिखता है। शिक्षा के क्षेत्र में विकास नहीं होने के कारण आज भी लाखों रुपए बिहार से बाहर जा रहे हैं। अगर यहां बेहतर इंजीनियर,मेडिकल व मैनेजमेंट कॉलेज खुल जाएं तो छात्रों का पलायन तो रुकेगा ही साथ ही बिहार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। सरकार को कृषि क्षेत्र पर अधिक ध्यान देना होगा क्योंकि आज भी बिहार इसी क्षेत्र पर अधिक निर्भर है। बाढ़ व सुखाड़ की समस्या पर गंभीरता से विचार कर उसे हल करना पड़ेगा। सरकार घोषणाएं तो करती हैं पर उसका सख्ती से पालन नहीं करवाती है। माप-तौल कानून में संशोधन किया गया पर इससे भला व्यवसाइयों का नहीं हुआ पर माप-तौल महकमा के अधिकारी मालामाल हो गए। 

-रमेश तलरेजा, सचिव बिहार खुदरा व्यवसायी संघ

टूरिज्म में बहुत स्कोप है
भ्रष्टाचार व जातिवाद की समस्या को खत्म किये बगैर और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में ठोस कदम उठाए बिना बिहार को आगे ले जाना बहुत मुश्किल है। हालांकि विकास के मार्ग में बाधाएं बहुत हैं पर इसके बीच ही हमें रास्ते तलाशने होंगे। टूरिज्म के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। हमारे पास बोधगया है, नालंदा है, राजगीर व पावापुरी भी है। इन स्थलों को इस कदर विकसित किया जाए कि हमारे यहां इंटरनेशल टूरिस्टों की बाढ़ आ जाएगी। लेकिन टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतरी के लिए कोई जहमत नहीं उठा रहा है। पहले टूरिस्ट प्लेसों के लिए डेली बस सर्विसेज थीं। पटना से काठमांडु के लिए एयरसर्विस थी पर अब सब बंद है। अभी तो स्थिति ऐसी है कि टूरिस्ट के नाम पर यहां अस्पतालों में इलाज कराने वाले ही आते हैं। राजधानी में न तो माल है और मल्टीप्लेक्स। सरकार को चाहिए कि बिहार को आगे ले जाने के लिए इन सब चीजों पर भी विशेष ध्यान दे। खासकर पर्यटन में तो बहुत काम करना है।

-रमेश बजाज, कोषाध्यक्ष बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन

इंडस्ट्री लगने से ही पैसा भी आएगा
बिहार में समस्याओं की कमी नहीं है। सबसे बड़ी समस्या तो आधारभूत संरचना की है। इसके बाद भ्रष्टाचार की। कानून-व्यवस्था की भी समस्या अहम है। भ्रष्टाचार व भयमुक्त वातारण बनाना होगा तभी यहां इंडस्ट्री फल-फूल सकेगा। आधारभूत संरचना में आमूलचूल बदलाव लाना पड़ेगा। इंडस्ट्री लगने से ही राज्य विकास के पथ पर अग्रसर हो सकेगा। इंडस्ट्री लगने से ही राज्य में पैसा भी आएगा। रोजगार की समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकेगी। सरकार को चाहिए कि गुजरात की तर्ज पर यहां उद्यमियों को आमंत्रित किया जाए। यहां उद्यम लगाने की संभावनों पर बहस होनी चाहिए। इसके लिए राजनीतिक नेतृत्व को भी ईमानदार होना होगा। उन्हें ईमानदारी से इस दिशा में काम करना होगा। दूसरी ओर आम नागरिकों को भी अधिकार के साथ अपने कर्तव्य पालन की ओर भी विशेष ध्यान देना होगा।

-अंजनी सुरेका , संयुक्त महामंत्री बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन


अनाज पर कर से राहत मिले
राज्य में व्यवसाय व उद्योग-धंधे पनप नहीं रहे हैं। इसके कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है स़डक, पानी व बिजली की समस्या। बैंकों का रवैया सकारात्मक नहीं होने से भी बाधाएं उत्पन्न होती हैं। सरकारी स्तर पर सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हो पाती हैं। अनाज तक पर भी कर है। चावल बाहर से मंगाने पर पांच फीसदी कर लग जाता है। बिहार में एक फीसदी कर देना पड़ता है जबकि बाहर से प्रवेश पर चार फीसदी। इसमें व्यापारियों को राहत मिलनी चाहिए। दरअसल यह चार फीसदी का टैक्स एफसीआई के लिए मुख्यत: लगाया गया क्योंकि इससे राज्य को लाखों रुपए की आ होती है पर सिमें आम व्यापारी भी पिस रहे हैं। दूसरी ओर इससे आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। क्योंकि उन्हें चावल के लिए अधिक पैसे चुकाने पड़ जाते हैं। सरकार की इस ओर विशेष ध्यान देकर व्यवसाई तबके को कर में राहत देना होगा। 

-संजीत रंजन, व्यवसायी


सरकार का आदेश ही लागू हो
जातिवाद, राजनीतिक द्वेष व अफसरशाही। राज्य के विकास में ये सबसे बड़ी बाधाएं हैं। राजनीतिक द्वेष व जातिवाद की समस्या तो राज्य को बर्बाद कर चुकी है। सरकार की ओर से राज्य के लिए विकास की कई योजनाएं बनायी जाती हैं पर इनका कार्यान्वयन ठीक से नहीं हो  पाता है। अगर सरकार का आदेश सही तरीके से लागू हो जाए तो राज्य की तस्वीर व तकदीर बदल जाएगी। केन्द्र व राज्य में अलग-अलग सरकारों के रहने से भी समस्याएं खत्म होने की बजाए बढ़ ही जा रही हैं। केन्द्र सरकार का बिहार के प्रति रवैया हमेशा से ही सौतेला रहा है। केन्द्र नहीं चाहता है कि बिहार आगे बढ़े। केन्द्र का सौतेला व्यवहार बदल जाए तो राज्य की अधिसंख्य समस्याएं अपने आप खत्म हो जाएंगी व हम भी देश के अन्य राज्यों के मुकाबले खड़े हो सकेंगे।

-अशोकचंद, सदस्य  बिहार खुदरा व्यवसायी संघ

जनता की आवाज

जब हमने बिहार के बदलाव को लेकर एक बहस की बात सोची थी तो आम लोगों के इतने सक्रिय भागीदारी की कल्पना भी नहीं की थी। हमें बड़ी संख्या में एसएमएस मिल रहे हैं और कई नए मुद्दे सामने आ रहे हैं। लोग हिंदुस्तान के इस बहस को सार्थक मान रहे हैं और विचारों के माध्यम से उसे एक दिशा भी दे रहे हैं। सूबे के जनमानस की यही सक्रियता इस प्रदेश को गति देगी। विचारों का यह प्रवाह बताता है कि बदलाव तो बिहार चाहता है। इसके पास सोच भी है और ताकत भी। हम स्थानाभाव में भारी संख्या में एसएमएस को छाप नहीं पा रहे हैं इसका हमें खेद है।

सबसे पहली जरूरत है कि इस भ्रष्ट तंत्र को सुधारा जाए। बिना पैसा दिए कहीं एक काम तक नहीं होता। यह भ्रष्टाचार की हद है। -सुषमा, चूनापुर रोड, पूर्णिया

सबसे अहम बात है कि बिहारी समाज एकजुट है ही नहीं। छोटे दायरों में कैद होकर लोग छोटी-छोटी लड़ाई में फंसे हैं।  - 9576224264


गुनाह जनता का भी तो है तो दोष सिर्फ सरकार को क्यों? जब चुनाव होता है तो लोग जाति-पैसा-शराब के लिए वोट करते हैं तो बाद में स्वस्थ बिहार कहां से बन जाएगा?  - 9709503337

जब तक हम निकम्मों और कानून-व्यवस्था को तोड़ने वालों को सम्मानित करते रहेंगे तब तक यह व्यवस्था बीमार बनी रहेगी। -पीके दरगन, मुजफ्फरपुर

आरक्षण की नीति अपनाई गई तो एक बेहतर समाज के लिए थी पर इसने तो बीमारी और बढ़ा दी।  - जीएन विंद, बेगूसराय


जाति विशेष के नाम पर समाज की समरसता को खराब किया जा रहा है। बेहतर व्यवस्था के नाम पर यह सब जारी है। इससे परहेज करना होगा।   -9771857029

बिहार पिछड़ा इसीलिए है कि यहां के नेता खाते बहुत हैं। जिस दिन बेहतर इच्छाशक्ति से काम करना शुरू कर देंगे कल्याण हो जाएगा।  - 9534733561

सीएम को चाहिए कि वे अलग-अलग विभागों में किसी काम के लिए अपने आदमी को योजनाबद्ध तरीके से भेजें और भ्रष्टाचार की जानकारी मिलने पर उसे खत्म करने के लिए उचित कार्रवाई करें।   - मुकेश, 9934831176

जैसी जनता होगी वैसी ही सरकार भी होगी। अगर जनता ही जात-पात जैसी बातों में उलङी हुई है तो आखिर कैसे एक बेहतर और स्वस्थ राज्य बन पाएगा। अगर हम इन छोटी बातों में उलङो रहेंगे तो आखिर कैसे कुछ बड़ी और बेहतर बात संभव है।  -9199397604

दुनिया कहां से कहां भागी जा रही है और हम आज भी बिहार में अशिक्षा और जातिवाद जैसी बातों से जूझ रहे हैं तो यह हमारा दुर्भाग्य ही है।   - भारत कुमार, 9204049150

बिना किसी योग्यता परीक्षा के शिक्षकों की बहाली सिर्फ वोट की सियासत के लिए किया गया है। इसके बाद अगर हम अशिक्षा और ऐसे अन्य मुद्दों की बात करें तो यह मजाक ही कहा जाएगा।  - मो. असजग जुल्फी, संग्राम, मधुबनी

अगर बिहार को बदलना है तो सबसे पहले बेहतर शिक्षा की व्यवस्था जरूरी है। इसके अलावा भ्रष्टाचार का खात्मा राज्य से बहुत जरूरी है।  - मो. साकिब, पटना

बेहतर बिहार के लिए शिक्षित समाज का निर्माण करना पड़ेगा। हर क्षेत्र में युवाओं को सक्रिय होना होगा।  - अंबर, 9334231159

गरीब जनता का खून पीकर सत्ता में लोग अट्टाहास कर रहे हैं। शासन में बैठे लोगों को आत्मसमीक्षा की जरूरत है।    - मृणाल जमुआर, जक्कनपुर, पटना

देश के नेता जनता से दूर हो गए हैं। नक्सलवाद जैसी समस्याओं ने भी सूबे को छलनी कर दिया है।   -राजीव लाल कर्ण, कटिहार

मेरे विचार से सबसे ज्यादा सुधरने की जरूरत यहां की जनता को है। हम आंख के सामने भ्रष्टाचार होते हुए देखते हैं और उसे बर्दाश्त करते रहते हैं। हमें इसके खिलाफ खड़े होना चाहिए।  - अमिताभ कुमार झा, भवानीपुर, मधुबनी

बिना मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रदेश का विकास हो ही नहीं सकता। और मेरे विचार से इसे कुछ आप्शन्स में सिमटाया नहीं जा सकता। इसके लिए व्यापक दायरे में सोचना होगा।  - प्रभु, पटना

मेरी समझ में नहीं आता कि प्रदूषण जैसे मुद्दे पर आखिर कोई चर्चा क्यों नहीं करता। आपने भी अब तक इसे चर्चा का विषय नहीं माना।  - 9430481805

राजनेताओं को सुधरना होगा। जब तक दल बदलुओं और अपराधियों को सियासत में सम्मान मिलता रहेगा विकास की बात तो बड़े दूर की है। शुरूआत तो करनी होगी।  - वीणा, राजीव नगर, पटना

मेरे विचार से व्यवस्था में सबसे ज्यादा बीमारी तो राजनीति ने ही फैलाई है। व्यवस्था बेहतर हो इसके लिए आमूलचूल परिवर्तन आवश्यक है।  - 9430962935

बिहार के सुधार के लिए सिर्फ बड़ी बातों से बात नहीं बनेगी। नेताओं का काम तो भाषण देना है पर विकास का गणित सिर्फ भाषण से तो नहीं चलता है न? मुद्दों के लिए बड़े शोध की जरूरत नहीं है बल्कि चाहिए तो सिर्फ इच्छाशक्ति।  - मंत्रेश्वर मिश्र, सहरसा

महिलाओं के सुरक्षा को भी गंभीरता से लेना चाहिए। सरकार इतना माहौल भी नहीं दे पाई है कि एक महिला बिना डर के अपने घर से निकल सके।   - पल्लवी, सहरसा

अगर हम किसी समस्या के समाधान का सक्रिय हिस्सा नहीं बनते हैं तो यह सच्चई है कि हम ही समस्या बन जाते हैं।  - तारीक, भागलपुर

आम लोगों को बदलना होगा। आलम यह है कि लोग करना तो कुछ भी नहीं चाहते हैं बस सिर्फ समस्याओं पर सोचते हैं। - राजीव, मुंगेर

लोग अधिकार की बात तो करते हैं पर कर्तव्य की बात कौन करे? यह सच है कि बिहार में सरकारी तंत्र बीमार है पर वह पैदा तो इसी समाज में हुआ है न? उसका संरक्षण-संवर्धन तो इसी समाज ने किया है न? इंडिविजुअल के बदलने से ही बिहार बदलेगा।  - सपना आनंद, कायस्थ टोला, सहरसा

सूबा सुंदर बने इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत है सहभागिया की। लोगों को चाहिए कि आपकी सहभागिया बढ़ाएं ताकि एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके।  - प्रमोद झा, 9798697033

अशिक्षा, नक्सलवाद जैसी समस्याएं तो है पर अगर गहराई से देखें तो बसबे बड़ी समस्या है रोजगार के कमी की। अगर सरकार प्रदेश में उद्योगों को प्रोत्साहित करके उभरने का मौका दें तो रोजगार के अवसर पैदा होंगे और कुछ हद तक सुधार संभव हो सकेगा।     - 9006634001

जरूरी नहीं कि सिर्फ नेता बदलें तो बिहार बदल जाएगा। एक बेहतर शुरूआत तो खुद को बदलने से होती है। सबसे पहले खुद को बदलना होगा। - इम्त्याज अली भुट्टो, गोपालगंज

अगर प्रदेश का हर आदमी अपने विकास के साथ सूबे के विकास को जोड़कर देखे तो चमत्कार हो जाएगा। हर बड़े काम की शुरूआत छोटी होती है इसीलिए खुद को सुधारें समाज खुद ही सुधर जाएगा।  - 9308019298

आम लोगों की आदत हो गई है कि वे हर बात के लिए दूसरे को दोष देते हैं। लोग यह मानते हैं कि सारा दोष बीमार व्यवस्था का है। ऐसा नहीं होता। अपनी कमियों को स्वीकारें और उसी हिसाब से अच्छे बदलाव करें तभी एक बेहतर बिहार बन पाएगा। - जरीन, पूर्णिया

थोड़े भाषण, ड्रामेबाजी और हवी फायरिंग से बिहार नहीं बदलेगा। हमें जमीनी हकीकत तक जाना होगा। बातों की पड़ताल करनी होगी और उसके तलाश के गंभीर उपाय तलाशने होंगे।   - निधि कुमार सिंह, दरभंगा

बिहार के विकास के लिए तीन काम ईमानदारी से करने की आवश्यकता है। इससे आने वाले बीस सालों में बेरोजगारी भी खत्म होगी और प्रदेश का विकास भी होगा। पहली बात-कानून-व्यवस्था, दूसरी- ऊर्जा और तीसरी रोड।   - मो. आफताब, रमना रोड, पटना

अपने पद का गलत इस्तेमाल करने वालों को रोकना होगा। आज आम आदमी अपनी किसी भी बात को लेकर किसी विभाग में बस चक्कर ही काटता रह जाता है।  - 9852813958

मेरे विचार से जातिवाद, गरीबी, भ्रष्टाचार और अशिक्षा ने प्रदेश के विकास की गति को अवरूद्ध किया है। सरकार को इस दिशा में कुछ सख्त और प्रभावी कदम उठाना चाहिए। रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।  - अमित कुमार, रामपुर नौशहन, हाजीपुर

जाति आधारित आरक्षण देने से समाज में खाई चौड़ी ही होगी। इस तरह की कोशिशों से बचना चाहिए। ऐसी व्यवस्था समाज को सुधारेगी नहीं बल्कि बिगाड़ेगी।  - भास्कर झा, 9576981574

बिहार के विकास के लिए सबसे बड़ी बाधा है अशिक्षा। गांव-गांव में शिक्षा का दिया जलाना होगा। इससे जागरूकता आएगी और एक बेहतर समाज बनेगा।  - आसिफ खान, सोनौली, छपरा

किसानों को खेत के लिए पानी मिले। बिहार की अर्थव्यवस्था आज भी कृषि आधारित ही है जबकि यहां कई तरह की दिक्कतें हैं। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की तरह यहां भी प्रयास किए जाने चाहिए।  -  9835669707

अगर बिहार अपनी प्रतिभाओं का ही दोहन कर ले तो बिहार की शक्ल बदल जाए। बिहारियों ने तो दुनिया में बड़े बदलाव किए हैं यह इस प्रदेश की विडंबना है कि यह आज भी उपेक्षित है।  - नवीन कुमार, छात्र (एमएसडब्ल्यू), इग्नू

बिहार को समर्पित, ईमानदार और संकल्पित नेताओं की टीम चाहिए तो प्रदेश के विकास की बात सोचे और उस दिशा में काम भी करे।  - कल्पना, औरंगाबाद

बिहार की प्रगति के लिए सबसे पहले कानून व्यवस्था की दशा को सुधारना होगा। इसके बिना किसी बड़े बदलाव की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।  - 9708175361

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