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एनटीपीसी में विनिवेश को मंजूरी

एनटीपीसी में विनिवेश को मंजूरी

अरसे से लगभग ठहर सी गई विनिवेश की गाड़ी अब फिर से चल पड़ी है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की जानी-मानी बिजली कंपनी नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) की पांच फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का फैसला किया। इसके साथ ही इसी क्षेत्र की एक अन्य कंपनी सतलुज जलविद्युत निगम के भी विनिवेश का फैसला किया गया है।

अकेले एनटीपीसी की ही पांच फीसदी इक्विटी के बेच देने से सरकार को लगभग 8500 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद की जा रही है। इन कंपनियों के विनिवेश का फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) में लिया गया। इन कंपनियों के विनिविश से सरकार औद्योगिक मंदी और राजस्व में कमी के दौर में खासी राहत मिलेगी। वैसे यह पैसा फिलहाल सीधे सामाजिक क्षेत्र में खर्च होने के बजाय परंपरा के मुताबिक नेशनल इनवेस्टमेंट फंड (एनआईएफ) में जाएगा। 

सीसीईए के फैसलों की जानकारी देते हुये वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने संवाददाताओं को बताया कि इस समय एनटीपीसी में सरकारी इक्विटी 89.5 फीसदी पर है। इसकी पांच फीसदी इक्विटी बेच देने के बाद सरकारी इक्विटी घटकर 84.5 फीसदी पर रह जाएगी। एनटीपीसी के शेयरों के मौजूदा मूल्यों के मुताबिक सरकार को इस इक्विटी को बेचने से लगभग 8500 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद की जा रही है।

एनटीपीसी की मौजूदा उत्पादन क्षमता लगभग 30 हजार मेगावाट सालाना है। सरकार ने अभी सिर्फ इतना कहा है कि कंपनी के शेयरों की बिक्री पब्लिक को भी की जाएगी। पर इसके विनिवेश से कितना पैसा आएगा इसका आकलन सरकार नहीं कर पाई है।

इसके साथ ही सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की एक अन्य कंपनी सतलुज जलविद्युत निगम की भी 10 फीसदी इक्विटी बेचने का फैसला किया है। यह केंद्र सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच एक साझा उपक्रम है। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 75 फीसदी है। इक्विटी विनिवेश के बाद केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कम होकर 65 फीसदी पर आ जाएगी। कंपनी की चुकता पूंजी 4108.81 करोड़ रुपये पर है।

कंपनी 10 साल के दौरान 23000 करोड़ रुपये की लागत से अपनी क्षमता 4000 मेगावाट तक बढ़ाने का फैसला किया है। शर्मा ने बताया कि इन कंपनियों के शेयरों का एक हिस्सा उनके कर्मचारियों को बेचा जाएगा। सरकार ने टेलीकॉम कंपनी यूनीटेक वायरलेस (तमिलनाडु) प्राइवेट लिमिटेड के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्ताव को भी सीसीईए ने हरी झंडी दे दी है। इसके जरिए देश में 3,740 करोड़ रुपये का एफडीआई आएगा।

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