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आईआईटी की राह और कठिन

आईआईटी की राह और कठिन

आईआईटी में प्रवेश का सपना संजोने वाले छात्रों की डगर और कठिन होने वाली है। सरकार अगले साल से पात्रता की शर्तो को 12वीं कक्षा में 80-85 प्रतिशत अंक कर सकती है। अभी प्रवेश परीक्षा के लिए 60 प्रतिशत अंक जरूरी हैं।

सोमवार को मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि आईआईटी-जेईई में उपस्थित होने के लिए 80 से 85 प्रतिशत अंक होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कुकुरमुत्तों की तरह उगे कोचिंग सेंटर छात्रों को आईआईटी में प्रवेश के लिए तैयारी कराते हैं। नतीजतन छात्र 12वीं की पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि उनका अधिक ध्यान प्रवेश परीक्षा की तैयारी पर रहता है।

आईआईटी परिषद की बैठक के बाद सिब्बल ने कहा कि आईआईटी-जेईई सिस्टम और कोर्स पर ध्यान देने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन होगा। समिति तीन महीने में होने वाले बदलावों पर सुझाव के साथ रिपोर्ट देगी। समिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साचिव टी. रामासामी, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव एम. के. भान और सीएसआईआर के महानिदेशक समीर ब्रहमचारी शामिल हैं।

आईआईटी जेईई सिस्टम में तीन वर्ष पहले पात्रता शर्त को बढ़ा कर 60 प्रतिशत अंक किया गया था।  इसके साथ ही 12वीं कक्षा के अंत में मिलने वाली छात्रवृत्ति की पात्रता शर्त में भी बदलाव करने का निर्णय किया है। अब वार्षिक पारिवारिक आय की पात्रता को दो लाख से बढ़ाकर 4.5 लाख रुपए करने का फैसला हुआ है।

सिब्बल ने कहा कि अधिक संख्या में विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए सरकार दक्षेस और अफ्रीकी देशों के छात्रों के लिए फीस कम करेगी। अभी विदेशी छात्रों को भारतीय की तुलना में अधिक फीस देनी पड़ती है। इस बारे में दो अलग तरह का फीस ढांचा है। एक दक्षेस के छात्रों के लिए और दूसरा अन्य देशों के लिए।

काकोदकर खींचेंगे खाका : आईआईटी में रिसर्च और राष्ट्रीय विकास की परियोजनाओं के लिए परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर के अगुवाई में एक समिति का गठन किया गया है।

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