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दो टूक (20 अक्तूबर, 2009)

भीतर छपी एक खबर बता रही है कि दिल्ली वालों को राष्ट्रमंडल खेलों में मेहमाननवाजी के गुर सिखाने की खातिर सरकार एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म बना रही है। पहल अच्छी है मगर उसमें एक ट्रेजडी है। अगले मानकर चल रहे हैं कि दिल्ली वालों को मेहमाननवाजी नहीं आती।

अतिथि देवो भव: की रट लगाने वाले देश को मेजबानी सिखाने के लिए फिल्म बने, यह बात थोड़ा तकलीफ देती है। लेकिन क्या करें, यह कड़वा सच है। हम अपने विदेशी मेहमानों के साथ कैसा सुलूक करते हैं, यह छिपी हुई बात नहीं। उनसे कई गुना किराया वसूलने या दस की चीज के सौ रुपये लेने की घटनाएं हमारे ही आसपास घटती हैं। इसलिए मेजबानी की इस क्लास का हमें स्वागत करना होगा। आतिथ्य की पाठशाला हमारे नगर की कीर्ति ही बढ़ाएगी।

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  • Web Title:दो टूक (20 अक्तूबर, 2009)