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शहर में विभिन्न मानकों पर बनेंगे भवन

आने वाले दिनों में एक ही शहर के अलग-अलग हिस्से में भवनों का निर्माण अलग-अलग मानकों पर होगा। केंद्र सरकार ने नेशनल बिल्डिंग एक्ट देशभर में लागू कर दिया है लेकिन जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) शहरों के लिए अलग नीति बनाने में जुटा है। इसके तहत प्रदेश के कई शहरों में भवन निर्माण के अलग-अलग मानक होंगे। इसके लिए सर्वे कराने के बाद हर शहर को कई हिस्सों में बाँटकर भवन निर्माण के अलग-अलग मानक तय कर दिए जाएँगे। यह कवायद भूकम्प से होने वाली तबाही कम करने के लिए है। 

इसके अंतर्गत पूरे देश को तीन श्रेणी में बाँटा गया है। भूकम्प की दृष्टि से सबसे संवेदनशील जोन चार और पाँच में पहाड़ी हिस्से आते हैं। हिमालय रीजन के कई शहरों का सर्वे पूरा हो चुका है। इस वक्त देहरादून और चंडीगढ़ का सर्वे चल रहा है। इसके बाद जोन थ्री के शहरों (इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी आदि) का सर्वे होगा। सबसे अंत में जोन दो में आने वाले हिस्से का सर्वे किया जाएगा। 

सर्वे के बाद जीएसआई तय करेगा कि किसी शहर का कौन सा हिस्सा भूकम्प की दृष्टि से अधिक संवेदनशील है और कौन हिस्सा कम। पहले से जोनों में बँटे शहर सर्वे के बाद फिर क्षेत्रों में बँटेंगे और वहाँ कोई भी निर्माण जीएसआई के सुझाव पर ही होगा। जीएसआई के वैज्ञानिक डॉ. सगीना राम ने बताया कि लातूर में भूकम्प के बाद ही देश के विभिन्न हिस्सों को माइक्रो जोनेशन के अंतर्गत बाँट दिया गया था। प्रथम चरण में अति संवेदनशील 28 शहरों का सर्वे कराया जा रहा है। इसके बाद तय होने वाले मानक के अंतर्गत निर्मित भवनों से भूकम्प के दौरान जानमाल का कम नुकसान होगा।

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