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हैलमेट : एक सुरक्षित करियर भी

स्वरोजगार करने का विचार जब किसी के मन में आता है, तो उसके दिमाग में एक सवाल जरूर उठ खड़ा होता है। आखिर कौन सा ऐसा काम किया जाए, जिसका सरकुलेशन बड़ा भी हो और बढ़ता भी रहे? व्यावसायिक पैमाने पर नाप-तौलकर जब अपनी क्षमता के अनुसार स्वरोजगार के क्षेत्र में व्यक्ति कदम रखता है तो मार्केटिंग के तमाम पचड़े उसके गले में अटके रहते हैं। ऐसी स्थिति में किसी ऐसे स्वरोजगार में हाथ आजमाना बेहतर लगता है जिसमें विज्ञापन का झंझट भी कम हो और ग्राहक भी खूब मिलें। हैलमेट उत्पाद एक ऐसा ही उम्दा स्वरोजगार है।

आज शहरों के सत्तर प्रतिशत घरों में दुपहिया मौजूद हैं। तथा हर टू व्हीलर चालक और साथी सवार को हैलमैट की आवश्यकता होती है। इस कारण तो हैलमेट की बिक्री होती ही है, साथ ही एक खास कारण यह है कि हैलमेट की उम्र वाहन के हिसाब से काफी कम होती है। साल दो साल में हर टू-व्हीलर पर सवारी करने वाला अपना हैलमेट अवश्य चेंज कर देता है। इस व्यवसाय में संभावनाएं इसलिए भी हैं कभी भी राज्य सरकारें शहरों में हैलमेट कम्पल्सरी कर सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो इस क्षेत्र में काम करने वालों की पौ-बारह ही समझनी चाहिए। यदि आप स्वरोजगार की खोज में हैं तो बेहतर है कि इस क्षेत्र में जांच-परख कर हाथ आजमा लें।

इसके लिए आपके पास क्या-क्या मजबूतियां होनी चाहिए, पेश हैं :
खर्च : हैलमेट उत्पाद में खर्च आपकी अपनी कैपेसिटी पर निर्भर है। वैसे लगभग पांच-छह लाख रुपये लेकर इस कारोबार में हाथ डाल सकते हैं।

स्थान : इस काम के लिए लगभग दो सौ से तीन सौ गज जगह होनी चाहिए। यदि आपके पास अधिक जगह और पैसा है तो काफी बड़े स्तर पर आपका काम शुरू हो सकता है।

कारीगर : हैलमेट बनाने के लिए आपको कारीगरों तथा हैल्परों की जरूरत पड़ेगी। यह सब आपको दो से पांच हजार रुपये प्रति माह पर मिल जाएंगे। इस काम में कम से कम तीन कारीगर और चार-पांच हैल्पर होने चाहिए। यदि आप हैलमेट का काम जानते हैं, तो और बेहतर है।

रॉ मैटीरियल : बल्लभगढ़, नोएडा, मुम्बई, दिल्ली, मद्रास, आदि जगहों से आप कच्च माल यानी रॉ मैटीरियल खरीद सकते हैं। रॉ मैटीरियल खरीदते समय क्वालिटी का ध्यान रखें। अपने नाम का लोगो बनवाने के लिए स्टीकर बनाने वाली कम्पनी से सम्पर्क करें।

रजिस्ट्रेशन व आईएसआई : अपनी कम्पनी का लोगो तैयार कराने तथा उसकी अनुमति के लिए आपको ट्रेड मार्क एक्ट, दिल्ली से सम्पर्क करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त आईएसआई के रीजनल ऑफिस से तैयार हैलमेट्स पर मुहर लगवानी भी पड़ेगी तभी आपका हैलमेट ओरिजनल तथा बिक्री अथॉरिटी में आएगा।

सप्लाई : हैलमेट दुपहिया चालक की सुरक्षा की खास जरूरत माना जाता है। इसीलिए तैयार माल की सप्लाई तो हर शहर में कर सकते हैं। इसके लिए आपको वहां के डीलरों से सम्पर्क साधना पड़ेगा। दिल्ली, चंडीगढ़ और जयपुर में इसकी सप्लाई खूब होती है।

आय : इस काम में आय आपकी डीलिंग तथा बिक्री पर निर्भर है। फिर भी पांच-छह लाख रुपये की लागत से आप चालीस-पचास हजार रुपये प्रतिमाह कम से कम कमा सकते हैं।

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