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धान की पैदावर कम

सूखा पड़ने से इस बार धान की पैदावार कम हुई है। फसल की लागत के बराबर भी सरकार किसानों को धान का मूल्य नहीं दे पा रही है। लिहाजा किसानों को धान की खेती मंहगी पड़ रही है। किसान धान बेचकर बेटी के हाथ पीले करने की सोच रहे थे, पर उनको अब साहूकारों से कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
धान की खेती में आने वाली लागत अब बीस गुना बढ़ गई है। खाद-बीज की बात तो दूर, डीजल के दाम ही पन्द्रह साल में करीब बारह गुना बढ़ गए हैं। धान की कीमत पाने के लिए किसान मंडियों के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले साल मुच्छड़ व बासमती धान 29 सौ रुपये कुंतल के भाव बिक गया था। इस बार उसी धान को मात्र 17 सौ रूपए कुंतल में खरीदा जा रहा है।

-अब तक जिले में सरकारी केंद्र नहीं
जिले में अभी तक सरकारी खरीद केन्द्र भी नहीं खोले गए हैं। लागत के हिसाब से धान की कीमत न मिलने से किसान परेशान हैं। शफीपुर के किसान इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि पहले तो सूखा पड़ा, बिजली नहीं आई तो डीजल के इंजन व ट्रैक्टरों से ट्यूबवेलों को चलाकर धान की फसल की सिंचाई करनी पड़ी। डीजल के रेट ही 12 गुना बढ़ गए हैं। डीजल के साथ खाद, बीज, पानी, कीटनाशक, गुड़ाई व मंडी तक पहुंचाने का खर्चा जोड़ लिया जाए, तो किसान को मेहनत भी नहीं मिल पा रही है।

-धान की कीमत
दादरी, जेवर, दनकौर अनाज मंडी में परमल धान 11 सौ, 1121, मुच्छड़ 16 से 1950, सरबती एक हजार से 13 सौ, सुगध 11 से 1350 रूपए प्रति कुंतल है।

-कौन-कौन है खरीदार
क्षेत्र में इन धानों के खरीददार आरबीएल, एनबी, एलटी, गुरु गोरखनाथ, स्टार, सत्यवती समेत कई राइस मिल हैं। दादारी मंडी में अलीगढ़, एटा, मैनपुरी, मथुरा, खुर्जा, बुलंदशहर, गुलावठी, मुरादनगर क्षेत्रों के किसान धान बेचने के लिए रोजाना आते हैं।

-सरकार का कहना
एडीएम ओपी आर्य का कहना है कि धान खरीदने के लिए दादरी, जेवर, दनकौर मंडियों में सरकारी खरीद केन्द्र खोले जा रहे हैं। किसानों का धान सरकारी रेट पर खरीदा जाएगा। किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।

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