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नोएडा पुलिस को कंप्यूटर की जगह पंसद है पुलिसिया डंडा

कॉमनवेल्थ गेम्स सर पर हैं और नोएडा पुलिस है कि कंप्यूटर से दूर भाग, डंडे के बल पर ही शहर व्यवस्था सुधारने की बात करती है। ऐसा नहीं है कि उसे हाईटैक करने का प्रयास नहीं किया जा रहा, प्रयास किया जा रहा है, लेकिन न तो कोई प्लानिंग है और न ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इसमें रूचि दिखाते है। जिस कारण पुलिस करोड़ों खर्च के बाद भी हाईटैक योजनाओं से दूर भाग रही है।


आईटी सिटी और प्रदेश के कमाऊ क्षेत्र नोएडा में पुलिस को हाईटैक बनाने के लिए क्लोज सर्किट कैमरे, मोबाइल एसएमएस से एफआईआर तथा ईमेल के जरिए शिकायतों का निपटारा जैसी सुविधा पूर्व में स्थानीय लोगों को दी गई थी। यही नहीं जागरुक शहर के लिए नोएडा पुलिस डॉट कॉम के अलावा ट्रैफिक की प्रदेश में एकमात्र वेबसाइट बनाई गई। लेकिन वर्तमान पुलिस को यह सभी व्यवस्थाएं रास नहीं आई। नतीजतन सभी योजनाओं और हाईटैक प्रणालियों को ठंडे बस्ते में डाल कर रख दिया गया है।


तत्कालीन एसएसपी पीयूष मोर्डिया ने पुलिस के हाथ से डंडा हटा, उसका कंप्यूटरीकरण कर नोएडा पुलिस को प्रदेश की नहीं, बल्कि देश की हाईटैक पुलिस का दर्जा दिलवाया। इसके अलावा अथॉरिटी के प्रयासों के चलते इन योजनाओं पर करोड़ों रुपए बहाए गए, लेकिन वर्तमान में सभी कंप्यूटरीकृत योजनाएं दम तोड़ रही हैं।


पुलिस को हाईटैक बनाने के तहत सेक्टर-18 में लाखों रुपए की लागत से 16 क्लोज सर्किट कैमरों को लगवाया, लेकिन वर्तमान में वे कहां है, इसका पता पुलिस को भी नहीं है। इसके अलावा प्राधिकरण व विशेष फंड राशि का प्रयोग कर पूर्व एसएसपी ने कंप्यूटर पर व एक मोबाइल कंपनी से संपर्क साध एसएमएस कर एफआईआर दर्ज कराने में भी प्रदेश में अव्वल रहने में बाजी मारी। 9818866100 पर एसएमएस कर कोई भी व्यक्ति कार चोरी की रिपोर्ट सहित, अपराधों के संबंध में जानकारी दे व ले सकता है। लेकिन वर्तमान में मोबाइल नम्बर बंद पड़ा है।
एसएमएस के जरिए एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया को स्वयं पुलिस वाले ही भूल चूके है। शहर में तैनात 99 फीसदी पुलिसकर्मियों को एसएमएस करने वाला नम्बर ही नहीं मालूम, शायद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं। इसके अलावा ई-मेल के जरिए एफआईआर दर्ज कराने की पहल की गई, लेकिन वह भी कागजों तक ही सिमट कर रह गई। इन व्यवस्थाओं के जरिए शहर के अपराधों पर अंकुश लगाने का फार्मूला तो असफल हुआ ही है, साथ ही प्रदेश में हाईटैक बनी छवि को भी गहरा धक्का लगा है।

मैं अपने स्तर पर प्रतिदिन वेबसाइट अपडेट करने का प्रयास करता हूं, पर यह संभव नहीं है। लेकिन अब आपको प्रतिदिन वेबसाइट अपडेट मिलेगी, और जल्द ही मुख्य मार्किट व संवदेनशील चौराहों पर अथॉरिटी से बात कर कैमरे लगवाने का प्रयास करुंगा।
-एसएसपी एके सिंह

लोगों की मांग--
सभी मार्किटों में लगें क्लोज सर्किट कैमरे
अथॉरिटी प्रत्येक आरडब्ल्यूए सेक्टर के गेट पर लगवाए कैमरे
एफआईआर की जाए ऑनलाइन
वेबसाइट को किया जाए अपडेट
अथॉरिटी सहित पुलिस की साईट पर हो सुरक्षा संबंधी जानकारी

कंप्यूटर सहित कैमरों पर नोएडा पुलिस पांच वर्ष में खर्च कर चुकी है 12 करोड़
वेबसाइट व ईमेल पर प्रतिवर्ष खर्च होते हैं 10 लाख

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