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पुलिस की नाक के नीचे होता है अवैध खनन

यूपी-हरियाणा प्रांत के समीप बसे गांवों में तहसील व पुलिस प्रशासन की मिलीभगत के चलते यमुना से अवैध खनन किया जा रहा है। जिससे दोनो प्रांतों में खनन को लेकर, खूनी रंजिश के चलते करीब एक दर्जन लोगों को मौत के घाट उतारा जा चुका है।


पुलिस व प्रशासन की मिलीभगत से रोजाना यमुना नदी से सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्राली आदि वाहनों से रेत भरकर ले जाई जाती हैं। जिनको यूपी, हरियाणा के अलावा दिल्ली, उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में भेजा जाता है। जिससे रोजाना लाखों रुपए का व्यापार किया जा रहा है। मगर इस अवैध कारोबार पर अधिकारी कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। इस बारे में अफसरों का रटा-रटाया जवाब है, कि सूचना मिलते ही कार्रवाई की जा रही है।

यहां होता है अवैध खनन-
तहसील क्षेत्र के गांव कानीगढ़ी, झुप्पा, गोविन्दगढ़, जेवर खादर, सिरौली बॉगर, फलैदा, बेगमाबाद तक माफियाओं का जाल फैला हुआ है। यमुना नदी में तो बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। इन से संबंधित रजवाहें व नहरें भी सुरक्षित नहीं हैं। जेवर के अलावा जहांगीरपुर, रबूपुरा, ककोड़ क्षेत्र के गांवों में भी खनन माफियाओं से महफूज नहीं हैं।

वन अधिनियम के ये हैं नियम-
भारतीय वन अधिनियम 1927 के अर्न्तगत रेत वन सम्पदा में आती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेश में बिना वन विभाग की एनओसी के अवैध खनन पर पाबंदी लगाई है। यमुना नदी या उसके अर्न्तगत आने वाले रजवाहें, नहरों का 95 प्रतिशत क्षेत्र वन संपदा में आता है।

ऐसे होता है खेल-
खनन माफिया की पुलिस व प्रशासन के साथ सांठगांठ है। इसी के चलते दिन-रात यमुना नदी, रजवाहों व माइनरों से ट्रैक्टर-ट्रॉली, बुग्गी आदि द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है। यह पुलिस प्रशासन को सेवा शुल्क देकर विभिन्न जनपदों में भिजवाया जाता है। ऐसे में माफियाओं के हौसलें बुलन्द हैं।

अवैध खनन से हानि
पहले बाढ़ आने पर खादर क्षेत्रों में कुछ समय बाद पानी वापस चला जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। रजवाहों, माइनरों में तो कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। जिस कारण रेत खनन से बने गड्ढों में डूबकर कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं।

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