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’मैं भारत का संविधान हूं, लालकिले से बोल रहा हूं’

साठा चौरासी के वीरों की स्मृति में हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से युवाओं की भुजाओं को फड़का दिया। कवियों ने युवाओं से उग्रवाद का समूल नाश करने का आह्वान किया।


आरएसएस इंटर कॉलेज धौलाना में 1857 की क्रांति में शहीद हुए साठा चौरासी के 14 शहीदों की स्मृति में तृतीय अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। साठा चौरासी विकास संस्थान के सौजन्य से हुए सम्मेलन में वीर रस के कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपनी पंक्तियों ‘हर हिंदुस्तानी के दिल में खोल रहा हूं, मैं भारत का संविधान हूं, लालकिले से बोल रहा हूं’ से माहौल में जोश भर दिया।


डॉ. अर्जुन शिशौदिया ने ‘उग्रवाद का होगा निष्टकंटक अमरनाथ पंथ, मानसरोवर में सरोज खिल जाएगा। आत्महत्या कर लेगा उग्रवाद, जिस दिन दिल्ली को पटेल मिल जाएगा।’ से युवाओं की भुजाओं को फड़का दिया।
इसके बाद विनीत चौहान, अरुण जैमिनि, विधु सक्सेना, सरदार रतनसिंह, मनोज कुमार मनोज, बलवीर खिचड़ी, प्रवीण शुक्ला, गुणवीर राणा, अलीहसन मकरैंडिया ने भी अपनी पंक्तियां पढ़ी। इस मौके पर सुधीर राणा, एल्लम तोमर, सोनू राणा, विनोद शिशौदिया, देवेंद्र शिशौदिया, ललित राणा आदि मौजूद थे।

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