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सलाखों के पीछे बंद भाइयों के माथे पर बहनों ने लगाया तिलक

सबजेल में सलाखों के पीछे बंद भाइयों के माथे पर जब बहनों ने तिलक लगाया तो उनकी आंखें छलक पड़ीं। यह देख वहां मौजूद संतरी भी भावुक हुए बिना नहीं रह सके। जेल प्रशासन की ओर से बहनों को भाइयों से मिलने की विशेष व्यवस्था की गई थी। सोमवार सुबह कई महिलाएं भाइयों से मिलने सबजेल पहुंचीं।


सबजेल पहुंची महिलाओं के हाथों में मिठाई और तिलक लगाने के लिए थैली में रोली-चावल थे। जेल प्रशासन ने महिलाओं को उनके भाइयों से मिलने में अड़चन नहीं आने दी। सलाखों के पीछे बंद हंसराज की बहन तारावती का कहना है कि उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे अपने भाई को तिलक करने जेल आना पड़ेगा। उसे भाई को तिलक करने में कोई परेशानी नहीं हुई।


बंदी साहिब सिंह की बहन राधा व कौशल का कहना है कि उन्होंने अपने भाई को आसानी से तिलक कर मिठाई खिलाई। इतना जरूर है कि भाई को सलाखों के पीछे देख उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उन्हें कभी ऐसी उम्मीद नहीं थी, कि उनका भाई जेल जाएगा।


मिलाई के बाद सबजेल के इंचार्ज कुलवीर सिंह ने बताया कि सोमवार को बंदियों की संख्या 35 थी। उनकी मौजूदगी में महिलाएं अपने भाई को तिलक लगाने पहुंची।

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  • Web Title:जेल में बंद भाइयों ने भी मनाया भैयादूज