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निर्माण से खतरे में यमुनोत्री धाम

गंगोत्री मंदिर के चारों और अवैध रूप से निर्माण कार्य से धाम का अस्तित्व खतरे में है। चार धाम में शासन द्वारा निर्माण कार्यो पर पाबंदी के बावजूद धाम में नियम विरुद्ध निर्माण कार्य चल रहा है। मास्टर प्लान भी फाइलों में बंद होने से धाम कंकरीट के जंगल में तब्दील हो रहा है।

चार धाम में प्रसिद्ध गंगोत्री धाम अवैध अतिक्रमण व अव्यवस्थाओं की चपेट में है। गंगोत्री मंदिर के चारों और 2सौ मीटर तक निर्माण कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध का नियम है। जबकि गत दो वर्षो से शासन ने मास्टर प्लान का क्रियान्वयन न होने तक सभी निर्माण कार्यो पर पाबंदी लगायी गयी है।

बावजूद इसके मुख्य मंदिर से सटी काली कमली धर्मशाला समेत अन्य भवनों का निर्माण मंदिर की ऊंचाई से कई गुना बढ़ा कर आस्था को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मंदिर के ऊपर बने भवनों में शौचालय व अन्य निर्माण कार्य जारी है। ऐसे में यदि गंगा मंदिर के चारों और यूं ही अतिक्रमण व अवैध निर्माण जारी रहे तो धाम का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

वर्ष 2002 में भैरोझांप नाले में भारी हिमस्खलन से मंदिर व परिसर को भारी नुकसान पहुंचा था। भैरोझांप नाले के साथ गंगा घाटों में कटाव से भी धाम खतरे से खाली नहीं है। मुख्य मंदिर को जाने वाले मार्ग पर नियम विरुद्ध आड़े-तिरछे भवन व निर्माण कार्य किया गया। जबकि जोन पांच में स्थिति होने के बावजूद बहुमंजिले व भूकंपरोधी भवनों के विपरीत भी निर्माण किया जा रहा है।

धाम में गंगोत्री विकास प्राधिकरण भी सिवाय औपचारिकताएं निभाता हुआ नजर आ रहा है। जब मुख्य मंदिर ही अतिक्रमण व अवैध निर्माण के चपेट में हो तो अन्य पर क्या कार्यवाही हो रही होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है। स्टाफ व संसाधनों के अभाव में प्राधिकरण भी राम भरोसे चल रहा है।

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  • Web Title:निर्माण से खतरे में यमुनोत्री धाम