DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नेट-जेआरएफ में निगेटिव मार्किग लागू

यूजीसी ने नेट-जेआरएफ की राह और कठिन कर दी है। परीक्षार्थियों को इस बार निगेटिव मार्किग का सामना करना पड़ेगा। इस परीक्षा के पहले और दूसरे प्रश्नपत्र में हरेक गलत उत्तर पर आधा अंक काट लिया जाएगा। यह फैसला युवाओं पर दोहरी मार की तरह है क्योंकि इसी वर्ष से यूजीसी ने पीएचडी को लेक्चरर बनने की अर्हता के दायरे से परोक्ष तौर पर हटा दिया है।

यूजीसी की नेट-जेआरएफ परीक्षा उन युवाओं के रास्ता खोलती है जो डिग्री कॉलेजों या विवि में शिक्षक बनना चाहते हैं अथवा शोध करना चाहते हैं। इस परीक्षा में तीन प्रश्नपत्र होते हैं जिनमें पहले दो प्रश्नपत्र ऑब्जेक्टिव टाइप हैं। कुछ वर्ष पहले तक इस परीक्षा में निगेटिव मार्किग का प्रावधान था लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया। बीते सालों में यूजीसी ने पीएचडी उपाधि वाले युवाओं को नेट से छूट दी लेकिन इस बार यूजीसी का रुख कड़ा है।

बीती जुलाई में पीएचडी के लिए नए रेगुलेशन जारी करने और नेट को अनिवार्य बनाने से युवाओं के सामने परेशानी खड़ी हुई थी। अब, नई चुनौती यह है कि यूजीसी ने निगेटिव मार्किग को दोबारा लागू करके खड़ी की है। आगामी दिसंबर में प्रस्तावित नेट-जेआरएफ परीक्षा के लिए जारी ब्योरे में स्पष्ट किया गया है कि पहले और दूसरे प्रश्नपत्र में हरेक गलत उत्तर के लिए आधा अंक काट लिया जाएगा।

इन दोनों प्रश्नपत्रों में दो-दो अंकों के सौ-सौ प्रश्न होते हैं। नई व्यवस्था से साफ है कि अनुमान के आधार पर सही विकल्प को चुनकर नंबर पा लेने का दौर अब खत्म हो जाएगा। उदाहरण के लिए यदि किसी परीक्षार्थी ने सौ में 60 प्रश्न सही और 40 गलत किए हैं तो उसे मिले 120 अंकों में से 20 अंक निगेटिव मार्किग के चलते साफ हो जाएंगे। नई व्यवस्था से सामान्य और ओबीसी आवेदकों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ेगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नेट-जेआरएफ में निगेटिव मार्किग लागू