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बांध विस्थापितों के खेतों पर ये घर किसके हैं

टिहरी बांध विस्थापितों के खेतों में फसल की जगह बड़ी-बड़ी इमारतें उग आई हैं। हरिद्वार जिले के रोशनाबाद व शिवालिक नगर की इन इमारतों में बांध विस्थापित ढूंढकर भी नहीं मिलते। भू माफिया,अफसर व नेताओं की तिकड़ी ने पात्रता खरीदने, बेचने के धंधे में जमकर पैसा बनाया है।

शिवालिक नगर में विस्थापितों के लिए मात्र 85 एकड़ जमीन थी लेकिन अधिकारियों ने 104 एकड़ आवंटित कर दी। शुरू में टिहरी बांध विस्थापितों को हरिद्वार व देहरादून के ग्रामीण क्षेत्रों में 10-10 बीघा जमीन व एक आवासीय प्लॉट दिया गया। तब पूरे के पूरे गांव एक साथ बसाये गये। जब शहरों से लगी भूमि भी विस्थापितों के पुनर्वास के नाम पर अधिगृहीत की जाने लगी तो मानक बदल गए। 10 बीघा की जगह सवा या ढाई बीघा जमीन दी जाने लगी।

तिकड़ी सक्रिय हुई। कर्मचारियों की मदद से विस्थापितों को प्लाट आवंटन के मामले में तंग किया जाने लगा। ऐसे में पात्रता खरीदने बेचने का धंधा पनपा। उनसे कहा जाता-  प्लाट का इंतजार कब तक करोगे जाकर पात्रता बेच दो। शुरू में गिरोह में कुछ कर्मचारी व छुटभइय्या नेता ही शामिल थे लेकिन बाद में अफसर व रसूख वाले नेता भी इसमें शामिल हो गये

शिवालिक नगर व रोशनाबाद में कभी विस्थापितों के लिए अधिगृहीत की गई सिंचाई विभाग की जमीन अब नगरीय क्षेत्र में शामिल हो गई है और बदली परिस्थिति में वहां नक्शे का झंझट भी नहीं रहा। उधर सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ा होने की वजह से रोशनाबाद के विस्थापितों के प्लाट भी गिरोह के निशाने पर हैं।

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