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डायनासोर विलुप्त करने वाला उल्कापिंड गिरा था भारतीय तट पर

डायनासोर विलुप्त करने वाला उल्कापिंड गिरा था भारतीय तट पर

आज से साढ़े छह करोड़ साल पहले अंतरिक्ष से 40 किलोमीटर से अधिक चौड़ाई वाला एक विशालकाय उल्कापिंड 58 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से धरती पर गिरा था और उसने डायनासोर प्रजाति को विलुप्त कर दिया। भारतीय मूल के एक प्रोफेसर के एक ताजा अध्ययन के अनुसार यह घटना भारत के पश्चिमी तट पर हुई थी।
    
ओरेगन में पोर्टलैंड में कल जियोलाजिकल सोसाइटी आफ अमेरिका के सम्मेलन में अनुसंधान पत्र पेश करने वाले टेक्सास टेक विश्वविद्यालय के शंकर चटर्जी ने कहा कि यदि हम सही हैं तो भारत के पश्चिम में स्थित जलमग्न शिव बेसिन हमारे पथ्वी पर स्थित सबसे बड़ा केट्रर है। शिव बेसिन में ही बांबे हाई स्थित है जो खनिज तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्खनन का एक बड़ा केन्द्र है।
   
चटर्जी ने अपने अनुसंधान दल के साथ शिव बेसिन का बारीकी से अवलोकन किया था। यहां तेल और गैस संसाधनों के लिए गहनता से खनन किया गया है। चटर्जी ने कहा कि यह संभवत: विश्व में खोजा गया अब तक का सबसे बड़ा क्रेटर (खड्ड) है और इसका व्यास करीब 40 किलोमीटर है ।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों से प्राप्त सूचना सहित भारतीय और अमेरिकी अनुसंधान दल की ओर से किये गये कार्य ने सबसे मजबूत साक्ष्य दिया है। यही वह स्थान है जहां डायनासोर को खत्म करने वाला उल्कापिंड गिरा था ।

चटर्जी ने उस दावे को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि पथ्वी पर मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप के निकट एक विशालकाय क्षुद्रग्रह के गिरने से डायनासोर मारे गये थे। उन्होंने कहा कि मेक्सिको में जो चीज गिरी थी वह आठ से 10 किलोमीटर चौड़ी थी।
    
जियोलाजिकल सोसाइटी आफ अमेरिका के मुताबिक भूगर्भीय साक्ष्य चौंकाने वाले हैं। शिव बेसिन की बाहय परिधि खुरदरी और उसके भ्रंश छल्लों का व्यास करीब 500 किलोमीटर है जिसके मध्य में एक उंचा स्थान है। इस शीर्ष को बांबे हाई के नाम से जानते हैं। सोसाइटी ने कहा कि केट्रर का बड़ा हिस्सा भारत के महाद्वीपीय शेल्फ में जलमग्न है लेकिन अपटतीय क्षेत्रों में उंचे क्लिफ, सक्रिय अपभ्रंश और गर्म झरने हैं।
    
सोसाइटी के मुताबिक धक्के से भारत के पश्चिमी तट पर स्थित ग्रेनाइट की 48 किलोमीटर परत का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया होगा। केट्रर के मध्य में स्थित चट्टानों के परीक्षण के लिए चटर्जी के दल के इस साल के अंत तक भारत दौरे पर आने की संभावना है। किस प्रकार इतने विशाल टक्कर से विचित्र बेसिन का निर्माण हुआ इसके प्रमाण देना तब संभव होगा।

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