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मंदी के कारण आेपेक नहीं करेगा उत्पादन में कटौती

वैश्विक अपील के सामने झुकते हुए तेल निर्यातक देशों के संगठन आेपेक ने आखिरकार तेल उत्पादन में और कटौती नहीं करने का फैसला किया है। आेपेक के इस फैसले से वैश्विक मंदी से जूझ रहे देशांे ने राहत की सांस ली है। जानकारों के मुताबिक आेपेक के इस फैसले से न सिर्फ वैश्विक मंदी से जूझ रहे देशांे को राहत मिली है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता देश अमेरिका के साथ उसके रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद भी जगी है। आेपेक ने वियना में आयोजित बैठक में तेल उत्पादन में कटौती पर विचार करते समय विश्व समुदाय की उस अपील पर गंभीरता से गौर किया जिसमें कहा गया था कि तेल उत्पादन और आपूर्ति में और कटौती पहले से मंदी की मार झेल रही विश्व अर्थव्यवस्था के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक आेबामा ने बैठक शुरू होने के पूर्व आेपेके के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब के शासक शाह अब्दुल्ला को संदेश प्रेषित कर दुनिया की बेहतरी के हक में फैसला लेने की अपील की थी, जिसपर उन्हें सकारात्मक जवाब मिला था। बैठक के बाद आेपेक महासचिव अब्दुल्ला अल बदरी ने संवाददाताआें से कहा कि मैं यह नहीं कहना चाहता कि हमने आेबामा के समर्थन में यह कदम उठाया है, हां इतना जरूर है कि इस बार हमें विश्व समुदाय का कुछ अलग नजरिया देखने को मिला जो इससे पहले कभी नहीं दिखाई दिया था। गत वर्ष जुलाई में 147 डालर प्रति बैरल पर पहुंची कच्चे तेल की कीमतों के वैश्विक मंदी में मांग घटने से एक समय 32 डालर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने से चिंतित आेपेक देशों ने कीमतें थामने के लिए इसके उत्पादन और आपूर्ति में कुछ और कटौती पर विचार के लिए बैठक बुलाई थी। बड़े तेल उत्पादक वेनेजुएला के कटौती समर्थक कड़े रुख को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि इस बार कुछ अहम फैसला आ सकता है। हालांकि सऊदी अरब के मौजूदा 42 लाख बैरल प्रति दिन के कटौती स्तर को बरकरार रखने पर जोर देने के कारण यह भी तय था कि सदस्य देश सऊदी अरब को नजर अंदाज नहीं करेंगे। आखिरकार फैसला सबके हक में रहा और आेपेक देश तेल आपूर्ति कटौती का मौजूदा स्तर बरकरार रखने पर सहमत हो गए। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री स्टीवन चू ने कहा कि मुझे इससे खुशी हुई है पर हम तेल आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के रुख पर कायम रहेंगे। जेपी मोर्गन के तेल विशेषज्ञ लारेन्स ईगल ने कहा कि आज की तारीख में वैश्विक मंदी को दूर कर अर्थव्यवस्थाआंे को पटरी पर लाना तेल कीमतों को 5 या दस डालर बढ़ाने से यादा जरूरी है। कुछ जानकारों का यह भी कहना था कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश की सख्त नीतियों की जगह आेबामा के नरम रवैए का भी प्रभाव आेपेक फैसले पर दिखा है। अमेरिका के कट्टर विरोधी देश ईरान और वेनेजुएला के चुपचाप आेपेक फैसले को स्वीकार करने का संदेश विश्व समुदाय के बीच कुछ ऐसा ही गया है।

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  • Web Title: मंदी के कारण आेपेक नहीं करेगा उत्पादन में कटौती