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आशुतोष का अंतिमसंस्कार: दोबारा पोस्टमार्टम की उम्मीद खत्म

करोड़ों रुपए के भविष्य निधि घोटाले के मुख्य अभियुक्त आशुतोष अस्थाना की 17 अक्टूबर को जेल में हुई मौत के बाद कल रात उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जिससे दुबारा पोस्टमार्टम की उम्मीद पूरी तरह से खत्म हो गई।
 
मुख्य अभियुक्त आशुतोष अस्थाना की पिछले 17 तारीख को गाजियाबाद के डासना जेल में हुई मृत्यु से रहस्य गहरा गया है। भविष्य निधि घोटाले में देश के कई वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल हैं। उसकी मृत्यु से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं क्योंकि मामले की सुनवाई के दौरान उसके बयान ने ना केवल महत्वपूर्ण भूमिका अदा की बल्कि उसने तमाम महत्वपूर्ण साक्ष्य भी उपलब्ध कराए जिससे न्यायाधीश मुश्किल में पड़ सकते थे।
 
गाजियाबाद पुलिस की मौजूदगी में कल रात आशुतोष का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने के लिए उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका पर कल सुनवाई होनी है। आशुतोष की पत्नी और घोटाले की अभियुक्त सुषमा अस्थाना ने कल आरोप लगाया था कि उसके पति को जान का खतरा था और उसे जेल में जहर देकर मारा गया। उन्होंने अपने पति की मौत की केन्द्रीय जांच ब्यूरो
(सी.बी.आई) से जांच की मांग की है।

आशुतोष की मौत का परिवार वालों को उस वक्त पता चला जब वह उसे दीपावली के दिन जिला जेल में मिठाई देने गए। राज्य जेल विभाग ने मौत की जांच उपमहानिरीक्षक जेल को सौंपी है जबकि गाजियाबाद जिला प्रशासन इसकी अलग से जांच कर रहा है।
 
गाजियाबाद पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि जहर से मौत की पुष्टि हुई तो उसके वेसरा को सुरक्षित रखा जाएगा और उसे फारेन्सिक जांच के लिए भेजा जाएगा। आशुतोष 23 करोड़ रूपए से ज्यादा के भविष्य निधि घोटाले का मुख्य अभियुक्त था और उसे गाजियाबाद के जिला जेल की कोठरी नम्बर पांच बी में रखा गया था। उसकी कोठरी निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेन्द्र कोली के बगल में थी। गाजियाबाद जेल प्रशासन का दावा है कि सीने में तेज दर्द के बाद उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया था जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित किया था।
 
 राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) ए.के.जैन ने कहा कि आशुतोष की मौत की जांच गाजियाबाद जिला प्रशासन को सौंपी गई है और रिपोर्ट आने के पहले इस मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
 
इस बीच आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि भविष्य निधि घोटाले के साथ आशुतोष की मौत की जांच भी केन्द्रीय जांच ब्यूरो कर रहा है। जिला अदालत में तहसील नाजिर के रूप में कार्यरत आशुतोष ने पिछले साल सितम्बर में सीबीआई की अदालत में दिए अपने बयान में उच्चतम न्यायालय के एक उच्च न्यायालय के बारह और जिला अदालत के 24 न्यायाधीश पर घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया था।
 

गाजियाबाद में वकीलों की संस्था के पूर्व अध्यक्ष नाहर सिंह ने इस मामले में दायर याचिका में कहा था कि 2001 से 2008 तक गाजियाबाद क्षेत्र के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते से करोड़ों रूपए निकाले गए हैं। न्यायपालिका के सर्तकता विभाग ने जांच में पाया कि ऐसे कर्मचारियों के नाम से भी भविष्य निधि खाते से पैसे निकाले गए जो अपनी रकम पहले ही ले चुके थे।
 
सतर्कता अधिकारी और विशेष जिला न्यायाधीश रमादेवी ने पाया कि आशुतोष ही इस मामले में प्रमुख था। जांच के दौरान पता चला कि सन 2002 से लेकर फरवरी 2005 तक जालसाजी करके पांच करोड़ से अधिक रुपए निकाले गए। इसी आधार पर उन्होंने कविनगर थाने में 16 फरवरी 2008 को आशुतोष सहित 83 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। जिनमें 39 अदालत के कर्मचारी थे। इनके खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 420, 467 और 471 के अलावा भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
 
बाद में गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में 67 लोगों को गिरफ्तार किया और आशुतोष सहित इन लोगों ने यह खुलासा किया कि वह इस रैकेट का सिर्फ हिस्सा थे जबकि इस मामले में मुख्य रुप से न्यायपालिका के कुछ वरिष्ठ सदस्य लाभान्वित हुए। गाजियाबाद पुलिस ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से संदेह के घेरे में आए न्यायाधीशों से पूछताछ की अनुमति मांगी थी जो नहीं मिली। गाजियाबाद पुलिस ने आशुतोष की पूरी संपत्ति यह कहते हुए जब्त कर ली कि यह गलत तरीके से अर्जित की गई थी।

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