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सेना के आधुनिकीकरण में मदद करेगा अमेरिका

सेना के आधुनिकीकरण में मदद करेगा अमेरिका

भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे रोएमर ने कहा कि सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए भारत के अभियान में अमेरिका मदद करने को तैयार है। रोएमर ने वायु सेनाओं के पांच दिवसीय संयुक्त अभ्यास 'कोप इंडिया 2009' का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने भारत को रक्षा उपकरणों की आपूर्ति में अमेरिका की विश्वसनीयता को लेकर व्याप्त शंका को भी दूर किया।

रोएमर ने कहा कि मैं जानता हूं कि कुछ लोगों को भारत को सैन्य उपकरणों की आपूर्तिकर्ता के रूप में अमेरिका की विश्वसनीयता के बारे में आशंका है। मैं आपसे कह सकता हूं कि हमारे रिश्ते कुछ साल पहले की तुलना में आज कहीं अलग हैं।
  
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि जब इस तरह की आशंकाएं थी तब से भारत-अमेरिका रिश्ते एक लंबा सफर तय कर चुके हैं।  आज की दुनिया अलग है। उर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा विकास और व्यापार सभी क्षेत्रों में हम सहयोग कर रहे हैं। सभी क्षेत्रों में हमारे रिश्ते मजबूत हुए हैं। रक्षा का क्षेत्र अलग नहीं है।

रोमर ने सी-130 सुपर हर्क्यूलस और सी-17 ग्लोबमास्टर परिवहन विमान का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों विमान अमेरिकी वायुसेना में काफी उपयोगी हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि भारतीय वायु सेना सी-130
जे को खरीदने के फैसले से काफी खुश होगी। आपका पहला विमान आज से एक साल से कुछ अधिक समय में 2011 की शुरूआत में पहुंच जाएगा। हमें महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आपके साथ सहयोग करने पर गर्व है।
 
भारत ने अपने विशेष बलों के अभियानो के लिए छह सी-130 जे विमानों का ऑर्डर दिया है और ये विमान राष्ट्रीय राजधानी के पास गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस में रहेंगे। सी-17 विमान के बारे में रोमर ने कहा कि इस विमान की खरीददारी का एक प्रस्ताव इस समय रक्षा मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन है।

उन्होंने कहा कि क्या भारत को इस विमान को खरीदने का फैसला करना चाहिए, मैं उम्मीद करता हूं कि आप (भारत) इसे खरीदने का फैसला करेंगे और हम आपकी सामरिक क्षमता बढ़ाने के लिए जो भी बन पड़ेगा वह करेंगे।

सी-130 जे सुपर हर्क्यूलस चार इंजन वाला टर्बोप्राप सैन्य परिवहन विमान है जिसका निर्माण लाकहीड मार्टिन ने किया है। यह विमान 20 टन सामग्री या पूर्ण रूप से सुसज्जित सैनिकों को ले जाने में सक्षम है। सी-17 ग्लोबमास्टर बोइंग निर्मित एक विशाल सैन्य परिवहन विमान है, जिसकी क्षमता 75 टन सामग्री या 135 सैनिकों को ले जाने की है।

भारत-अमेरिका सैन्य अभ्यासों के दायरे, जटिलता और शैली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोप इंडिया 2009 वर्ष 2003 से दोनों देशों के बीच हो रहा छठा अभ्यास है।

भारत-अमेरिका सैन्य युद्ध अभ्यास आगरा से कुछ मील दूर बबीना कस्बे में चल रहा है। इस अभ्यास में अमेरिकी सेना के स्ट्राइकर (इनफेन्ट्री काम्बेट व्हीकल) और पिछले साल रेड फ्लैग में भारतीय वायु सेना की शिरकत दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग का परिचायक है। दोनों देशों के बीच अगले साल मालाबार नौसैनिक युद्ध अभ्यास होगा।

रोमर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच स्वस्थ एवं विकसित होते रक्षा संबंध उस व्यापक सामरिक भागेदारी का हिस्सा है, जो समान सिद्धांत और साझा राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर आधारित हैं। अमेरिका और भारत के बीच एक मजबूत सामरिक भागेदारी क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है। मसलन शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने तथा क्षेत्रीय मानवीय संकट एवं प्राकृतिक आपदाओं की सूरत में उनसे निपटने के लिए यह सहयोग आवश्यक है।

 

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