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चंडीगढ़ के लिए अलग प्रशासक की योजना

केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल को दिए गए अतिरिक्त प्रभार को वापस लेने तथा इसकी जगह अपने सीधे नियंत्रण में वहां एक मुख्य आयुक्त नियुक्त करने की योजना बना रही है।
   

प्रस्तावित योजना के अनुसार केंद्रीय अतिरिक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी को चंडीगढ़ के मुख्य आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाएगा जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में होगा। यह व्यवस्था पंजाब में आतंकवाद भड़कने से पहले 1980 के दशक के मध्य तक मौजूद थी। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल को प्राप्त कुछ शक्तियां केंद्रीय गृहराज्य मंत्रियों में से एक को दी जाएंगी तथा मुख्य आयुक्त को वैसी ही स्वायत्तता प्राप्त होगी जैसी कि 1980 के दशक के मध्य तक प्राप्त थी।
   

मौजूदा व्यवस्था के तहत पंजाब के राज्यपाल को मिला चंडीगढ़ का अतिरिक्त प्रभार 16 नवम्बर तक जारी रहेगा जब पदस्थापित जनरल (अवकाशप्राप्त) एसएफ रॉड्रिग्स कार्यालय छोड़ेंगे। हालांकि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी बना रहेगा।

वर्तमान में गृह मंत्रालय चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार के रूप में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की नियुक्ति करता है। पंजाब में आतंकवाद भड़कने के बाद केंद्र ने चंडीगढ़ में शासन की व्यवस्था बदल दी थी और प्रशासक के रूप में इसकी जिम्मेदारी पंजाब के राज्यपाल को सौंप दी थी। ताकि पंजाब तथा चंडीगढ़ के प्रशासन व पुलिस के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। लगभग दो महीने पहले केंद्र शासित प्रदेश की कई नामी गिरामी हस्तियों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन भेजकर शासन की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की मांग की थी। कुछ नागरिकों ने मुख्य आयुक्त प्रणाली के समर्थन में विचार व्यक्त किए थे।

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