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एक यात्रा दूसरों के खातिर

एक यात्रा दूसरों के खातिर

आजकल यात्राओं का जमाना है। कोई चुनावी यात्रा करता है तो कोई पर्यटन की खातिर, कोई रोमांच के लिए तो कोई आस्था में बह कर। पर यह एक अलग तरह की यात्रा है। 10 अक्तूबर को गुवाहाटी से इस ज्ञान ज्योति यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। गुवाहाटी में अपना परचम फैला कर यह यात्रा पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पांडिचेरी, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, झरखंड और हरियाणा से होकर गुजरेगी तथा गुवाहाटी में ही 20 जनवरी, 2010 को इसका समापन होगा। गुवाहाटी इसलिए, क्योंकि 1977 में गुवाहाटी में ही एक कार्यक्रम में उपजे विचार ने 84 में जब बीज का रूप धारण किया तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन यह बीज युवा वृक्ष का रूप ले लेगा।

10 अक्तूबर, 77 को समाज के पिछड़े और विकलांग लोगों के कल्याण के लिए उपज अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच 20 जनवरी, 1985 में अपने राष्ट्रीय स्वरूप में प्रकट हुआ। अपनी स्थापना के रजत जयंती वर्ष में मंच देश भर में कई कल्याणकारी कार्य करने जा रहा है। यह यात्रा उसी का एक हिस्सा है। यात्रा के दौरान 300 से अधिक स्थानों पर नेशनल एड एंड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से 300 से अधिक ब्लड डोनेशन कैंप लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से 25 हजर से अधिक यूनिट रक्त संग्रह किया जएगा। इसके अतिरिक्त मंच देशभर में कई स्थानों पर विकलांगों के लिए कृत्रिम अंग भी देगा। 100 दिन के इस कार्यक्रम के तहत 100 कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण कैम्प आयोजित किए जएंगे। तीन मोबाइल वर्कशॉप भी इस मशाल यात्रा के साथ रहेंगी।

10 स्थानों पर पोलियो करेक्टिव सजर्री के कैम्प लगाए जाएंगे, जहां लोगों का नि:शुल्क इलाज किया जाएगा। मंच का ध्येय देश से विकलांगता को समाप्त करना है। हाल ही में संगठन ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अपने रजत जयंती कार्यक्रमों की घोषणा की। इस मौके पर अरुण बजज (संस्थापक, मारवाड़ी युवा मंच), जितेंद्र कुमार गुप्ता (राष्ट्रीय अध्यक्ष) और  प्रमोद जन (चेयरमैन) ने अपनी भावी योजनाओं के बारे में बताया।

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