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....ताकि ड्राइविंग न बने परेशानी का सबब

....ताकि ड्राइविंग न बने परेशानी का सबब

त्योहारों का मौसम तो है ही, शादी-ब्याह का मौसम भी है। ऐसे में मिस्टर वर्मा को अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां जाने की चिंता सता रही है। बात यह नहीं है कि वर्मा साहब उनके यहां जाने से कतरा रहे हैं, दरअसल समस्या यह है कि वर्मा साहब की कमर में दर्द रहता है और इस हालत में लंबे समय तक कार ड्राइविंग के विचार ने ही उन्हें तकलीफ देनी शुरू कर दी है। यह समस्या सिर्फ मिस्टर वर्मा के साथ नहीं है, आमतौर पर कार ड्राइव करने वाले ज्यादातर व्यक्तियों को इस तरह की परेशानी से दो-चार होना पड़ता है।

ब्रेस और स्प्लिंट (खपची) बनाने वाली कंपनी एमजीआरएम मेडिकेयर के द्वारा हाल ही में दिल्ली परिवहन निगम की बसों और अन्य बसों के चालकों के बीच किए गए एक शोध में पता चला कि ज्यादातर चालक कमर दर्द के शिकार हैं। दरअसल, सर्वेक्षण के दौरान कंपनी को यह भी पता चला कि कई बसों के बीच सड़क पर गाड़ी रोककर यात्रियों को इसलिए चढ़ाते हैं, क्योंकि कमर दर्द के चलते स्टेयरिंग व्हील को थोड़ा घुमाने में भी उन्हें दर्द होता है।

असल में, गाड़ी चलाते वक्त रीढ़ में व्यापक कंपन होता है। साथ ही शरीर के इस हिस्से को झटका लगता है। खराब सड़कें और गाड़ी का खराब बैलेंस इस समस्या को और बढ़ाने का काम करते हैं।चालक की सीट को पीछे की ओर धकेलने पर पांव सीधे हो जाते हैं, जिससे घुटने के पीछे की नस पर खिंचाव पैदा होता है। साथ ही ड्राइवर को सड़क पर सीधा देखने के लिए अपनी गर्दन को ऊंचा रखना पड़ता है, जिससे गर्दन पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ जाता है।
ऐसा नहीं है कि इस दर्द का शिकार सिर्फ गाड़ी चलाने वाला ही होता है, बल्कि सहयात्रियों को भी कमर में खिंचाव का सामना करना पड़ सकता है। कई कारों की सीटों के डिजाइन उपयुक्त नहीं होते, जिससे परेशानी बढ़ जाती है। जब व्यक्ति गाड़ी में बैठा होता है तो रीढ़ एवं कूल्हों के पिछले हिस्सों पर काफी दबाव पड़ता है। सीटिंग बोन शरीर के 75 फीसदी भार का ढोती है।  ऐसे में ध्यान न रखने पर व्यक्ति को शारीरिक परेशानी होने लगती है।

आइए जानते हैं कि आखिर किस तरह कुछ टिप्स को अपनाकर इस तकलीफ से बचा जा सकता है :

सीट की सही पोजिशन : जानकार बताते हैं कि कार में अगर बैठने की पोजिशन सही हो तो इस तरह की कई चिंताओं से मुक्ति पाई जा सकती है। सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपकी सीट क्लच और एक्सीलेटर से सही दूरी पर है।

ब्रेक लेना जरूरी : लंबे सफर के दौरान रास्ते में रुककर आराम कर लेना चाहिए। पांवों को फैलाने एवं अपनी मांसपेशियों के व्यायाम के लिए बीच-बीच में रुकने से आप खुद को ऐसी तकलीफ से बचा सकते हैं।

स्टेयरिंग व्हील के रहें करीब : ड्राइव करते समय स्टेयरिंग व्हील से उचित दूरी होनी चाहिए। यह सुनिश्चित कर लेना बेहतर होगा कि ड्राइव करते वक्त आपकी दोनों कोहनियां थोड़ी मुड़ी हों।

पट्टी बांधें तो मिले आराम : ऐसा करने से वाहन चलाते वक्त आपकी पोजिशन बिल्कुल सही रहेगी। इससे आपको गाड़ी चलाने के दौरान सुकून महसूस होगा। वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई फोम के मुलायम नेक कॉलर का इस्तेमाल लंबे सफर में काफी उपयोगी है। इससे गर्दन वाले हिस्से को नुकसान से बचाया जा सकता है। पर खरीदने से पहले एक बार इसके डिजाइन के बारे में किसी विशेषज्ञ से जानकारी लेना बेहतर होगा।

गाड़ी की कंडीशन का भी रखें ख्याल : अपनी गाड़ी की स्थिति की भी जांच कराते रहें। कार की कमियों को दूर कर इसे बेकार के झटकों और असहजता से बचाए रखना चाहिए। इसका सकारात्मक असर आपकी कमर पर पड़ेगा।

छोटी गद्दी, बड़ा आराम : छोटी गद्दी या कमर के लिए टेक का इस्तेमाल करें। यहां तक कि एक छोटे तौलिये को भी मोड़कर उसे कमर के निचले हिस्से एवं सीट के बीच रखकर लाजवाब नतीजा हासिल किया जा सकता है।

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