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थरूर का ट्वीटर प्रेम बढ़ा, कहा बाकी नेता भी आएं

थरूर का ट्वीटर प्रेम बढ़ा, कहा बाकी नेता भी आएं

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्वीटर पर हाल ही में विमान के इकोनॉमी क्लास को पशुओं का बाड़ा बताने को लेकर संकट में फंसे विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर चाहते हैं कि और अधिक भारतीय राजनेता इस नेटवर्किंग मंच का इस्तेमाल करें। उन्होंने यह अफसोस भी जताया कि विवादों में घिरने से उनके उत्साह में कमी आई है।

यहां एक ऑनलाइन रेडियो प्रसारण पर थरूर ने कहा कि ट्वीटर एक निर्वाचित नेता की कार्यशैली के अंदर झांकने के लिए एक उपयोगी जरिया है। वह कहते हैं कि वह और अधिक भारतीय नेताओं को ट्वीटर का इस्तेमाल करते हुए देखना पसंद करेंगे।

थरूर ने कहा कि मैं इस बहुत आकर्षक प्रसारण मंच का इस्तेमाल करते हुए अधिक भारतीयों को देखना पसंद करूंगा, ताकि वह अपने विचारों को यहां से प्रकट कर सकें। इस वक्त उनके तीन लाख से भी अधिक अनुयायी हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं।

थरूर हाल ही में विमान के इकोनॉमी क्लास को पशुओं का बाड़ा कहने को लेकर संकट में फंस गये थे। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि यह विवाद उनके सहकर्मियों को इस आसान माध्यम का इस्तेमाल करने के प्रति हतोत्साहित कर सकता है।

उन्होंने रेडियो प्रसारण की मेजबानी कर रहे जाने-माने भारतीय मूल के अमेरिकी पत्रकार श्रीनिवासन से कहा कि मुझे सिर्फ इस बात का अफसोस है कि यह विवाद उन कई राजनेताओं को रोक सकता है, जो इसके प्रति गंभीर हैं या इसका इस्तेमाल कर मेरा अनुकरण करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा राजनेताओं को इसके इस्तेमाल में इस बात का डर रहेगा कि कुछ इसी तरह के कार्य के जरिये वे भी कहीं वैसी मुश्किलों में न फंस जाएं, जिस तरह की मुश्किल में मैं घिर गया।

इस रेडियो कार्यक्रम में उन्होंने हाल की अपनी इस टिप्पणी को लेकर हुए बवाल पर और भारतीय राजनीति के एक नौसिखिया के तौर पर मिले सबक पर भी बड़ी ही सहजता से चर्चा की। न्यूयॉर्क की आधिकारिक यात्रा पर गए संयुक्त राष्ट्र के इस पूर्व राजनयिक ने कहा कि भारतीय राजनीति में एक नौसिखिया के रूप में मैंने यह सीखा कि मेरे लिए यह काफी नहीं है कि मैं क्या जानता हूं या जो कुछ भी मेरा कहने का इरादा हो उसके प्रति आश्वस्त रहूं, मुझे खुद से लगातार यह पूछना होगा कि अन्य लोग जान बूझकर या अनजाने में क्या गलत मतलब निकाल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को थोड़ा मंद कर सकता है। इस कड़वे अनुभव को ध्यान में रखते हुए वह ट्वीटर का इस्तेमाल जारी रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके शब्दों का सही अर्थ लोगों तक पहुंचे।

उन्होंने शेक्सपीयर के हवाले से कहा कि किसी बात की सफलता कहने वाले के कहने के ढंग की बजाय इस बात पर निर्भर करती है कि सुनने वालों ने उसे किस रूप में समझा।

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