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बन्नो तेरी लहंगा-चोली लाख की रे..

बन्नो तेरी लहंगा-चोली लाख की रे..

वेडिंग सीजन के दस्तक देते ही दुल्हनों के रूप-रंग और लिबास को लेकर तैयारियां कुछ ज्यादा ही तेज हो जती हैं। इस मौके पर खासकर लड़की का उत्साह देखते ही बनता है। ‘मैं भी अपनी वेडिंग ड्रेस के बारे में सोच-विचार में लगी हूं कि साड़ी पहनूं या लहंगा-चोली।’ कहती हैं रश्मि, जिनकी शादी दिसंबर में होनेवाली है।

स्टाइलिश पहनावा
साड़ी सदाबहार है, चाहे किसी खास अवसर पर पहननी हो या फिर रोजमर्रा की जिंदगी में, पर दुल्हन के लिबास के रूप में इसे लहंगा-चोली से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में दुल्हन के पहनावे के रूप में लहंगा-चोली को अधिक लोकप्रियता मिलने लगी है। हालांकि इस मामले में पसंद अपनी-अपनी है। पिछले दिनों सत्य पॉल के ब्राइडल कलेक्शन शो के दौरान जब अभिनेत्री जक्वेलिन फर्नाडिस से पूछा गया कि आपको क्या पसंद है, साड़ी या लहंगा-चोली? तो उनका जवाब था, ‘दोनों ही ड्रेसेज अच्छी हैं, पर मैंने फिलहाल लहंगा-चोली पहन रखी है और मुङो यह अधिक पसंद है।’

दुल्हन के लिबास के रूप में लहंगा-चोली साड़ी के मुकाबले आंखों को अधिक सुकून देती है और इससे एक ताजगी का एहसास होता है। ‘साड़ी के बजाय स्टाइलिश लहंगा-चोली को अपनाने में हर्ज ही क्या है। साड़ी पहनने के लिए और भी कई मौके हैं।’ कहती हैं कंप्यूटर इंजीनियर रोशनी, जो अभी शादी की योजना बना रही हैं।

फ्यूजन की संभावना
‘लहंगा-चोली का स्वरूप ऐसा है कि इसमें क्रिएटिविटी की संभावना कहीं अधिक है।’ कहती हैं फैशन डिजाइनर अनुराधा रामम। इस परिधान में मुख्य रूप से एड़ी तक पूरी लंबाई की एक स्कर्ट होती है, एक ब्लाउज या चोली होती है और एक स्टोल या दुपट्टा होता है, जो एक तरह से राजस्थानी राजसी पोशाक है। यह पहनावा कई मामले में वेस्टर्न ड्रेस स्कर्ट-टॉप से मेल खाता है। ‘अपने रूप-रंग के कारण लहंगा-चोली में इंडो-वेस्टर्न फ्यूजन की असंभावना अधिक होती है।’ कहती हैं फैशन डिजाइनर अनामिका खन्ना।

चोली परंपरागत भी हो सकती है और स्लीवलेस या नेक कट के अनुसार इसे पाश्चात्य रूप भी दिया ज सकता है। इसी तरह लहंगा को भी परंपरागत रखा ज सकता है या यूरोपीय स्कर्ट के रूप में ढाला ज सकता है। इसके अलावा घेरे की डिजइनिंग भी कई आकर्षक ढंग से की ज सकती है। कोशिश की जती है कि दुपट्टा या स्टोल भारी न हो।

फैब्रिक और कलर
कट के साथ-साथ लहंगा-चोली बनाने में फैब्रिक का खास ध्यान रखना पड़ता है, ताकि स्कर्ट के घेरे में फोल्ड सही आए। लहंगा के लिए ब्रोकेड, जॉजर्ट, चंदेरी आदि फैब्रिक को अच्छा माना जता है। इसके अलावा नेट के इस्तेमाल से भी इसे खूबसूरत बनाया ज सकता था। यदि रंगों की बात करें तो सुर्ख लाल रंग को ही कुछ समय पहले तक सबसे अधिक पसंद किया जता था, पर अब नीला, हरा, गुलाबी, चॉकलेटी, नारंगी आदि रंगों की लोकप्रियता भी बढ़ी है। इसके अलावा लहंगा-चोली में मल्टी कलर का इस्तेमाल भी देखने को मिल रहा है। ‘लहंगा-चोली को खूबसूरत बनाने में इसमें की गई तमाम चीजें, जैसे गोटा, लेस, जरदोजी, सिक्वेंस, क्रिस्टल आदि के अलावा कसीदाकारी की भी अहम भूमिका होती है।’ कहते हैं फैशन डिजइनर पुनीत नंदा। वसे इस बार मनीष मल्होत्रा ने एचडीआईएल कोतूर वीक के दौरान पेश किए गए अपने ब्राइडल कलेक्शन में एम्ब्रॉयडरी के मुकाबले ग्लैमरस लुक को ज्यादा तवज्जो दी।
    
रैंप पर लहंगा-चोली
वेडिंग सीजन शुरू होते ही जितने भी संबंधित फैशन शो या आयोजन होते हैं, उनमें लहंगा-चोली को खास प्रमुखता दी जने लगी है। पिछले दिनों हुए ब्राइडल एशिया-2009 से ही इसकी झलक मिलने लगी थी। इसके बाद लक्मे फैशन वीक, कोलकाता फैशन वीक, एचडीआईएल कोतूर वीक आदि तमाम आयोजनों और सोलो फैशन शो में भी रैंप पर लहंगा-चोली की खूबसूरती देखने को मिली। विक्रम फड़निस, रेणु टंडन, रीना ढाका, रितु बेरी, पुनीत नंदा, गौरव गुप्ता आदि तमाम फैशन डिजइनर इस बार लहंगा-चोली के खास कलेक्शन के साथ मौजूद हैं।   

शादी का मौका हो तो ऐसे में लड़की अब मॉडर्न भी नजर आना चाहती है। ऐसे में साड़ी में भले ही वह खूबसूरत दिखे, पर लहंगा-चोली में वह खुद को अधिक स्मार्ट महसूस करती है। बकौल डिजइनर रीना ढाका, ‘प्रयोग की संभावना अधिक होने से डिजाइनर लहंगा-चोली में दुल्हन जरा हटकर नजर आती है।’ स्वाभाविक है, ऐसे में लहंगा-चोली के प्रति दुल्हनों की दिलचस्पी तो बढ़ेगी ही।

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