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16 फरवरी 2008 को हुआ सनसनीखेज खुलासा

नजारत घोटाला एक ऐसा कांड था। जिसने पूरे देश की न्यायपालिका को हिलाकर रख दिया था। 16 फरवरी 2008 को खुले इस सनसनीखेज मामले में तत्कालीन जज रमा जैन ने आशुतोष अस्थाना समेत 63 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। अस्थाना ने अपने बयान में कई न्यायिक अधिकारियों के नाम लेकर सनसनी फैला दी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।


तत्कालीन विशेष सीबीआई जज रमा जैन ने 16 फरवरी 2008 को कवि नगर थाने में नजारत घोटाले का पर्दाफाश करते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें उस समय के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आशुतोष अस्थाना समेत 63 कोर्ट कर्मचारियों और व्यापारियों के नाम थे। पुलिस ने उसी दिन 28 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। अस्थाना पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पीएफ के 7.5 करोड़ रुपए को गलत ढंग से निकालने का आरोप था। अस्थाना ने अपने धारा 164 के बयान में मजिस्ट्रेट के सामने स्वीकार किया कि उसने यह काम कुछ न्यायिक अधिकारियों के कहने पर किया। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव और एक स्वयंसेवी संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को इस कांड की जांच करने के निर्देश दिए। फिलहाल मामले की जांच सीबीआई कर रही हैं और यह मामला गाजियाबाद की ईसी एक्ट कोर्ट में चल रहा है। शुरूआत में इस कांड में 63 लोग आरोपी बनाए गए। बाद में उनकी संख्या बढ़कर करीब 100 हो गई। इनमें से 45 लोग अभी भी जेल में हैं। जिनमें अस्थाना की पत्नी सुषमा, सास शकुंतला भी शामिल है।

नजारत कांड का घटनाक्रम
-16 फरवरी 2008 को तत्कालीन विशेष सीबीआई जज रमा जैन ने किया खुलासा।
-रमा जैन ने खुद कवि नगर थाने में दर्ज कराई एफआईआर।
-आशुतोष अस्थाना समेत 63 लोगों को बनाया गया आरोपी।
-पुलिस ने 28 लोगों को कांड के खुलासे के दिन किया गिरफ्तार।
-करीब एक माह बाद आशुतोष अस्थाना भी पकड़ा गया।
-बाद में आरोपियों की संख्या बढ़कर 100 हुई।
-सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंपी नजारत कांड की जांच।
-45 आरोपी अभी भी गाजियाबाद जेल में बंद।
-17 अक्तूबर को जेल में मुख्य आरोपी अस्थाना की मौत।

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