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शान्ति का नोबेल

कल कल्लू की दुकान पर हम पान खाने पहुँचे तो हमें सुखद आश्चर्य हुआ। वहाँ लोग नोबेल सम्मान पर झगड़ रहे थे। वह भी शान्ति के नोबेल सम्मान पर। हमें शक हुआ। या तो पान की दुकान यकायक प्रो0 (प्रोपराइटर) कल्लू के प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय हो गई है। नहीं तो, ओबामा भी अतीत के ख्याति प्राप्त गामा पहलवान के समान एक सर्वमान्य हस्ती हैं।

पान को अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता अभी नहीं मिल पायी है। अपनी राय में पान का ज़र्दा-किमाम सजा पत्ता गुणों की खान है। पान खाने वाला आस-पास सुगन्ध बिखेरता है। पीक के पिकासो बिना पेन्ट-ब्रश के प्रकृति के अलावा इंसान की बनाई सड़क-दीवाल के कैनवस पर सुन्दर और रहस्यमयी रचनायें करते हैं। पान से आदमी में वाणी-अनुशासन आता है। जिन के मुँह से शब्द और थूक निरन्तर झरता है, एक सतत् प्रवाहित झरने की तरह, वह भी पान खाकर चुप होते हैं। जैसे योग को बाबा रामदेव मिले, वैसे ही पान को किसी करिश्माई हस्ती की तलाश है।

हमें लगा कि स्थानीय राजनीति की चर्चा करने वाली दुकान पर नोबेल पुरस्कार पर नोक-झोंक ओबामा का ही कमाल है, एक झोलेवाले कॉमरेड सब को सुना रहे थे कि सारी गलती नोबेल की चयन समिति की है। उस में अमेरिका के पिठ्ठुओं का बोलबाला है। क्या उपलब्धि है ओबामा की? भाषण तो सभी राजनेता विश्व-बन्धुत्व और दुनिया में अमन चैन लाने के देते हैं। पर इस पर अमल कितने करते हैं? झोक़ का़ (झोलेवाले काँमरेड) जोश में आये- ऐसा चीन के अलावा किसने किया है? अगर कोई नोबेल शान्ति सम्मान का वाकई सुपात्र है तो वह हमारे चीन के राष्ट्रपति हैं।

झो.का.क की उबलती गरमाई तकरीर उत्प्रेरक थी। एक खाँसे तो दूसरा भी खाँस उठता है। कविता का मुगालता पालने वाले अब तक मौन रहे साहित्यकार ने पान का मोह त्यागा। पीक का विर्सजन कर दिल की भड़ास निकाली- आप ठीक कहते हैं, कॉमरेड! इस नोबेल सम्मान की वकत ही क्या है? यह तो हमारी सरकारी अकादमी का साहित्यिक पुरस्कार हो गया, जो काबिलों को नहीं, अपने-अपने चहेतों को मिलता है।

हम इतनी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुये। रेडियो-टी़ वी़ से सुने गये। सैकड़ों कवि-सम्मेलनों में भाग लिया। एक दर्जन काव्य संग्रह हैं अपने। कम्बख्तों ने पुरस्कार एक नामाकूल नौसिखिये को दे डाला। इतने में एक और सज्जन ने दोंनो के तर्कों को खारिज कर दिया। कतई सही मिला है नोबेल पुरस्कार। ओबामा, गाँधी के चेले हैं, हनुमान के भक्त हैं! नोबेल सम्मान का उन से योग्य उम्मीदवार कौन सम्भव है? बहस का बौद्घिक स्तर चरम पर था। हम वहाँ से फूट लिये!

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  • Web Title:शान्ति का नोबेल