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डीएनए लैब के इंतजार में पीजीआई रोहतक

रोहतक में स्थित प्रदेश के इकलौते पीजीआई को लम्बे समय से डीएनए लैब का इंतजार है। इसकी व्यवस्था का जिक्र पांच साल से हो रहा है, मगर इस ओर कदम ढाई कोस भी नहीं बढ़े हैं। डीएनए जांच की सुविधा उत्तरी भारत में कहीं नहीं है। जरूरत पड़ने पर इसके सैंपल हैदराबाद स्थित लैब में भेजे जा रहे हैं।

पांच वर्ष पहले इस लैब की स्थापना के लिए पीजीआई प्रबंधन ने एक बैठक में प्रस्ताव पास कर प्रोजेक्ट को पाइपलाइन में डाला था मगर बजट उपलब्ध न होने की वजह से वह दम तोड़ गया। प्रोजेक्ट का जिक्र जितनी जोर से उठा उतनी ही तेजी से समाप्त हो गया था। उस समय फोरेंसिक विभाग के मुखिया डॉ. धतरवाल थे।

डीएनए लैब की स्थापना के लिए बायोटेक्नोलॉजी विभाग बनाया जाना जरूरी हुआ। पीजीआई में यह विभाग भी स्थापित कर दिया गया। अमेरिका से पीएचडी करके आए डॉ. धार धालखंडी को विभाग का अध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. धतरवाल से यह प्राजेक्ट अब डॉ. धालखंडी के पास है।

जानकारी के मुताबिक डीएनए लैब की स्थापना में करीब पांच करोड़ रुपए का खर्च है। इस बजट की व्यवस्था प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना में हो गई है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाले 125 करोड़ रुपए के तहत इसकी व्यवस्था की गई है।

याद रहे पिछले वर्ष सांसद दीपेंद्र हुड्डा के सहयोग से पीजीआई रोहतक को एम्स का दर्जा दिए जाने के लिए 150 करोड़ रुपए की योजना को स्वीकृति मिली थी। 25 करोड़ रुपए राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाने हैं।

पीजीआई के निदेशक डॉ. चांद सिंह ढुल ने बताया कि उन्होंने डीएनए लैब का प्रोजेक्ट अन्य योजनाओं के साथ मंत्रलय को भेजा है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद लैब का कार्य शुरू हो जाएगा।

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