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कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने की योजना

राज्य सरकार अब कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने की मुहिम में जुटी है। पहले चरण में बिहार नागरिक परिषद को सक्रिय किया जा रहा है। अभी यह राज्य स्तर पर है। जल्द ही इसे जिला एवं थाना स्तर पर सक्रिय किया जाएगा। सबकुछ ठीक रहा तो एनडीए के हजार से अधिक कार्यकर्ता इसमें जगह पा लेंगे। सम्मान स्वरूप उन्हें नगद नारायण के दर्शन तो नहीं होंगे, मगर डीएम-एसपी और दारोगा के बीच बैठकर वे सामाजिक समस्याओं के निपटारे में अपनी राय जरूर देंगे।


नागरिक परिषद के पुराने संकल्प को नए सिरे से लागू किया जा रहा है। जिला नागरिक परिषद के अधिसंख्य पदधारी पदेन ही होंगे। लेकिन इसमें नौ कार्यकर्ताओं (सामाजिक) का मनोनयन मुख्यमंत्री करेंगे। इसके अलावा जिला स्तर पर दो उपाध्यक्षों एवं 11 सदस्यों का मनोनयन भी मुख्यमंत्री के स्तर पर होगा। इसी तरह थाना स्तर पर थाना नागरिक परिषद का गठन होगा। इसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के अलावा नौ सदस्य कार्यकर्ताओं के बीच से मनोनीत होंगे। मनोनयन में अनुसूचित जाति, जनजाति, अत्यंत पिछड़ा, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और महिला को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकारी अधिकारियों के अलावा सांसद, विधायक और विभिन्न क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधि भी जिला नागरिक परिषद के सदस्य होंगे। थाना स्तर पर सांसदों एवं विधायकों के मनोनीत प्रतिनिधि सदस्य होंगे।
आपदा प्रबंधन के अलावा सामाजिक सद्भाव के लिए भी नागरिक परिषद के सदस्य काम करेंगे। यही वह मुद्दा है जिसके नाम पर कार्यकर्ता सरकारी अफसरों से सवाल जवाब करेंगे। खबर है कि राज्य सरकार कुछ और संस्थाओं को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रही है जिसमें अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं को समायोजित किया जा सके।

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