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गायब नाभिकीय उपकरण से खतरे की आशंका

नंदा देवी की पहाड़ियों पर चीनी मिसाइलों की जानकारी के लिए स्थापित करने को ले जाए गए प्लोटिनियम 238 से युक्त नाभिकीय उपकरण का चार दशक बाद भी पता नहीं लग सका है। गढ़वाल क्षेत्र के सांसद व संसद की रक्षा मंत्रलय की स्थायी समिति के सभापति सतपाल महाराज ने इसका खुलासा करते हुए कहा कि इस अत्यंत घातक यंत्र का पता लगाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।

रविवार को यहां प्रदेश कांग्रेस भवन में पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्ष 1965 में अमेरिकन खुफिया एजेंसी ने चीन की मिसाइलों की जानकारी के लिए एक नाभिकीय उपकरण नंदा देवी की चोटियों पर भेजा था। इसे अमेरिकी व भारतीय पर्वतारोहियों का एक दल वहां ले गया था। इस उपकरण में प्लूटोनियम 238 के नाभिकीय शक्ति का प्रयोग किया गया था। चढ़ाई के समय तूफान में फंसने के कारण यह दल उस आणविक पैक को वहीं छोड़कर लौट गया था। बाद में वे उस पैक को लेने पहुंचे तो उन्हें वह नहीं मिला।

महीनों बाद तीन विशेष गुप्त अभियान उसकी खोज के लिए चलाए गए लेकिन वे उसे खोज नहीं सके। तब से नाभिकीय उपकरण नंदा देवी में ही लापता है। यदि इसे नहीं खोजा गया तो इस उपकरण में युक्त आणविक पैक अगले तीन सौ सालों तक पर्वतों का वातावरण दूषित करता रहेगा। इससे निकलने वाली रेडियोधर्मिता से प्रदूषित पानी के गंगा में मिलने की आशंका भी है।

उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में इसका जल्द पता लगाने की मांग करते हुए आशंका व्यक्त की कि इसके विकिरण के कारण ही कुछ पर्वतारोहियों की मृत्यु भी हुई, इसलिए नंदा देवी मार्ग बंद कर दिया गया।

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