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खरीद-फरोख्त

इक्विटी बाजार में निवेशक इससे अकसर पसोपेश में रहता है कि किस स्थिति में शेयर खरीदा और किस स्थिति में बेचा जाए। वैसे अगर सीधे तौर पर कहा जाए तो इन बातों का कोई सर्वमान्य हल नहीं है। स्थिति, समय, निवेश और परिस्थिति के अनुसार प्रत्येक के लिए इन बातों के अलग-अलग हल हैं। ऐसे में फैसला लेते वक्त हर पहलू को जांच परख लें।

जमानत
किसी व्यक्ति को बुकिंग प्रॉफिट और निवेश के बारे में पूरी जानकारी कर लेनी चाहिए। साथ ही यह ताकीद भी कर लेनी चाहिए कि रिटर्न कितना बेहतर आएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति को इस बात का अंदेशा हो कि एक निश्चित समय के बाद कम से कम उसे इतना पैसा तो मिल ही जाएगा तो वह कुछ समय इंतजार कर सकता है, लेकिन यदि रिटर्न की गारंटी नहीं है, तो यह समय फिर से पुनर्विचार करने का है, ऐसे में उसे फैसला करना होगा कि शेयर बेचना कहां तक सही है।

स्थिति का आकलन
आपने कितना निवेश, कितने समय के लिए किया है, किसमें किया है और उसकी स्थिति में तब से अब तक कितना परिवर्तन आया है, इसे समझना जरूरी है। साथ ही स्टॉक बेचने के लिए इंतजार करने में फायदा है या नहीं, इसकी भी गणना कर लेनी चाहिए। जैसे यदि किसी स्टॉक की वर्तमान में बेचने पर वैल्यू 2250 है, जबकि कुछ महीनों के इंतजार के बाद बेचने पर वह 2300 का हो गया। अगर इसे पहले बेचकर इससे मिले पैसे को निवेश करें तो बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।

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