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बस अड्डों को निजी निवेशकों को सौंपने के लिए प्रस्ताव

परिवहन निगम के बस अड्डों को निजी क्षेत्र में सौंपने की पहली रिपोर्ट अगले महीने राज्य सरकार के सामने पेश की जाएगी। कंसलटेंट ने पूरी तैयारी कर ली है, उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं राज्य सरकार ने सूबे के सात महानगरों में चलाई जाने वाली सिटी बसें खरीदने के लिए 400 करोड़ रुपए का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा है। इन बसों की खरीद जेएनएनयूआरएम योजना के तहत की जानी है।

उत्तर प्रदेश के बस अड्डों को पीपीपी के जरिए निजी क्षेत्र में देने की योजना को अंजाम देने के लिए नागपुर के कंसलटेंट ने काम शुरू कर दिया है। अगले महीने कंसलटेंट अपनी पहली रिपोर्ट परिवहन निगम के समक्ष प्रस्तुत करेगा। प्रदेश में परिवहन निगम के 243 बस अड्डे हैं। इनमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बस अड्डे गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, कानपुर, वाराणसी, फैजाबाद, गोरखपुर, इलाहाबाद, लखनऊ बरेली, मुरादाबाद और अलीगढ़ के हैं।

राज्य सरकार से कम्पनी द्वारा किए गए अनुबंध के मुताबिक कंसलटेंट की ओर से निवेश के हर पैकेज में यह व्यवस्था रखी जाएगी कि लाभकारी बस अड्डों के साथ वे बस अड्डे भी निजी डेवलपर को दिए जार्एँ जो आंशिक लाभ में हैं।

दूसरी ओर प्रदेश सरकार ने  प्रदेश के सात शहरों में 1310 सिटी बसें चलाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। केन्द्र से पहले चरण में मिली 80 बसों का संचालन लखनऊ से शुरू कर दिया गया है। लेकिन अभी और बसें खरीदी जानी है ताकि शहरों की परिवहन व्यवस्था चुस्त और दुरुस्त की जा सके। राज्य सरकार के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक परिवहन निगम ने अन्य शहरों में भी सिटी बसें चलाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

लेकिन जो धन पहले चरण में केन्द्र से आया था, वह खत्म हो चुका है। दूसरे चरण के लिए 400  करोड़ रुपए का प्रस्ताव फिर से भेजा गया है। केन्द्र को भेजे गए प्रस्ताव के मुताबिक लखनऊ और कानपुर में 300-300, आगरा में 200 बसें-मथुरा में 60 बसें और इलाहाबाद, वाराणसी और मेरठ में 150 बसें चलाई जाएँगी।

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