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बुनियादी मुश्किलों को हल करने की जरूरत

आगामी 20 अक्टूबर को आयोजित हो रहे ‘हिन्दुस्तान समागम-2009’ के तहत ‘हिन्दुस्तान’ कार्यालय पटना में बुधवार को विमर्श के लिए महिला संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। इस चर्चा में सूबे में कार्यसंस्कृति का अभाव, विकास एवं रोजगार के संबंध में ग्रामीण महिलाओं की स्थिति के साथ-साथ शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दे उभर कर सामने आए। सभी महिला प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि महिला सशक्तीकरण की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन इससे जुड़ी योजनाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा। प्रस्तुत है ‘आवाज’ की तीसरी कड़ी..।

खत्म करना होगा भ्रष्टाचार

मुझे बहुत उम्मीद नहीं हैं। चुनौतियां काफी हैं। लोगों को सारी सुविधाएं मिले यह संभव नहीं दिख रहा है। हर तरफ भ्रष्टाचार फैला है। हर स्तर पर लूट मची हुई है। विकास की सारी योजनाएं भ्रष्टाचार पर ही आकर खत्म हो जाती हैं। भ्रष्टाचार की वजह से ही आधारभूत संरचना भी विकसित नहीं हो पा रही है। प्रशासन में कार्यसंस्कृति का भी अभाव है। काम करने वाले बहुत ही कम हैं और नहीं काम करने वाले अधिक। भूमि सुधार दूसरी बड़ी चुनौती है। भूमि सुधार होगा तभी नक्सली हिंसा व गरीबी जैसी समस्याओं से निजात मिल सकेगी। कानून तो बने पर उसे सही तरीके से कार्यान्वित नहीं किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में भी नए-नए प्रयोग कर मजाक किया जा रहा है। महिलाओं को आरक्षण तो मिला है। राजनीतिक क्षेत्र में भी आरक्षण मिल जाए पर आशंका है कि इससे उन पर दमन भी बढ़ेगा। लूट व भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ तो 2020 का बिहार भी आज के बिहार से अलग नहीं दिखेगा।
प्रो. भारती एस कुमार, प्राध्यापक, पटना विवि


भूमि सुधार के बगैर विकास नहीं

हिंसा की जड़ में भूमि सुधार ही है। आजादी के 62 साल बाद भी इस समस्या को हल करने की कोशिश किसी ने नहीं की है। भूमि सुधार के बिना हम राज्य को 2020 में बेहतर स्थिति में देखने की कल्पना नहीं कर सकते हैं। गांवों को विकसित करने की ओर भी सरकारों का विशेष ध्यान नहीं है। हर स्तर पर भ्रष्टाचार से लोगों को जूझना पड़ता है। नरेगा की मिसाल सामने है। करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है। इन समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब हम योजनाओं के केन्द्र में ग्रामीणों व गरीब लोगों को रखेंगे। महिला सशक्तीकरण की बातें तो हो रही हैं पर बलात्कार, दहेज आदि की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी अराजकता है। कॉलेजों में गुंडागर्दी हो रही है। आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। इसके लिए एक नई मशीनरी चाहिए।
सरोज चौबे, प्रदेश अध्यक्ष, ऐपवा

बिटिया को बीए तक जरूर पढ़ाएं

मेरी नजर तो आधी आबादी की ओर लगी हुई है। इनकी बेहतरी के लिए बहुत कुछ नहीं हो रहा है। खासकर गांवों में महिलाओं का बुरा हाल है। लड़कियां पढ़ना चाहती है पर आगे नहीं पढ़ पा रही हैं। माध्यमिक स्तर के बाद नारी शिक्षा दम तोड़ जा रही है। कम से कम लड़कियों को बीए तक जरूर पढ़ाने का इंतजाम होना चाहिए। ऐसा होगा तब हमें यह कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि मुनिया बिटिया चलो पढ़ने या दीदिया चलो स्कूल। मेरी समझ है कि जनसंख्या वृद्धि में आधी आबादी की अज्ञानता ही छिपी हुई है। महिलाएं जब पढ़ेंगी -लिखेंगी तभी वह समझदार हो सकेंगी। इससे आबादी पर भी अंकुश लग सकेगा। हमारा इतिहास गवाह है कि प्राचीन काल में महिलाओं की इतनी बुरी स्थिति नहीं थी। कम उम्र में शादी की बात उस समय नहीं थी। वह स्वयं अपना वर भी चुनती थीं। स्वयंवर इसका गवाह है। सरकार की ओर से योजनाएं तो चल रही हैं पर हम खुश नहीं हैं।
उषा सिंह विज्ञान, शिक्षिका, केबी सहाय हाईस्कूल

मुंगेरी लाल की तरह न देखें सपने

हम सपने जरूर देखते हैं पर मुंगेरी लाल के हसीन सपनों की तरह। इन सपनों को हकीकत बनाने का कोई प्रयास नहीं होता है। सपनों को पूरा तभी कर सकते हैं जब हममें प्रतिबद्धता होगी। पर इसमें पूरी कमी दिखती है। यह भी सही है कि प्रशासनिक स्तर पर वर्क कल्चर का घोर अभाव है। यही वजह है कि हम आगे बढ़ने की बजाए पीछे ही जा रहे हैं। सरकार ने तीन साल पहले मछली पालन को लेकर एक बढ़िया सपना देखा। मंत्री गए हैदराबाद व वहां से बहुत कुछ सीख-पढ़ आए। लेकिन इसका हश्र लोगों के सामने है। पंचायतों में पचास फीसदी आरक्षण तो महिलाओं को मिला पर उन महिला जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। प्रशासनिक कार्यो को निबटाने में इससे महिला जनप्रतिनिधियों को बहुत मुश्किलें पेश आ रही हैं। प्रशिक्षण के लिए बाहर जाने की भी जरूरत नहीं है। हमारे यहां बढ़िया ट्रेनर भी मौजूद हैं। जरूरत है इच्छाशक्ति दिखाने की।
डा. शरद कुमारी, जिलाध्यक्ष, बिहार महिला समाज

शिक्षा क्षेत्र में सुधार जरूरी

सरकार आम आदमी के लिए जो भी योजनाएं शुरू करती हैं, उसकी सही तरीके से मॉनिटीरिंग नहीं कर पाती है। काम हो रहा है कि नहीं इसकी देख-रेख सही तरीके से नहीं की जा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार की जरूरत है। दूर जाने की जरूरत नहीं है। हालात यह है कि राजधानी पटना का एक बड़ा तबका आज भी स्कूल नहीं जा रहा है। आज हजारों लोग अशिक्षित हैं। बगैर शिक्षा के प्रदेश के विकास की बात करनी बेमानी होगी। सरकार को बेहतर शिक्षा देने के लिए ठोस पहल करने की जरूरत है। वहीं पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। नरेगा में चारों तरफ लूट मची हुई है। महिलाओं पर अत्याचार बढ़ा है। महिलाओं का सशक्तीकरण होना चाहिए। बगैर महिलाओं के विकास के सूबे का विकास संभव नहीं है। आज मंत्रियों के घर में ही बालश्रम कराया जा रहा है। समाज के सभी लोगों में सुधार की जरूरत है। बच्चों में भी नैतिकता के ज्ञान को देना होगा।
सुभाषिणी द्विवेदी, अखिल भारतीय महिला परिषद

सुलझाएं रोजी-रोटी की समस्या

मैं भी इन बातों से सहमत हूं कि भूमि सुधार और भ्रष्टाचार सबसे बड़ी चुनौती है। पिछली सरकार व आज की सरकार में मुझे कोई फर्क नहीं दिखता है। यह सरकार महिलाओं के आरक्षण का क्रेडिट ले रही पर इसने भी हमें खुशी-खुशी आरक्षण नहीं दिया है। योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जा रहा है जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। वास्तविक धरातल पर विकास नजर नहीं आता है। विकास हो रहा तो अधिकारियों का। जनप्रतिनिधि भी इस लपेटे में हैं। जिनके लिए सरकार योजना बनाती है वह उन तक पहुंच नहीं पाती है। योजनाओं की जानकारी भी उन तक नहीं पहुंच पाती है। सरकार पूरी ईमानदारी से काम नहीं करना चाहती है। घरेलू हिंसा कानून तो बन गया पर महिलाएं शिकायत किनके पास करने जाए। सक्षम पदाधिकारी की नियुक्ति अब तक नहीं हो सकी है। सरकार की नीयत में बदलाव लाना होगा। आधारभूत संरचना विकसित करनी होगी। रोजी-रोटी की समस्या सुलझाए बिना 2020 के बिहार की बेहतर कल्पना बेमानी है।
सुशीला सहाय, अध्यक्ष, बिहार महिला समाज

अपनी जिम्मेदारियां निभाएं

पूरा समाज सिर्फ राजनीतिक क्रियाकलापों पर नहीं चलता है। इससे इतर भी हमें सोचना होगा। राजनीतिक क्षेत्र में तो बहुत कुछ करने की जरूरत है हीं। साथ में न्यायिक क्षेत्र में भी बहुत सुधार की जरूरत है। लोगों को न्याय मिलने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। भ्रष्टाचार तो हर स्तर पर अपनी पैठ जमाए हुए है ही। इससे आम आदमी हर दिन जूझता है। यह सही है कि विकास उस गति से नहीं हो रहा है पर जो हालात बने हुए थे उसमें एक दिन में बहुत कुछ कर लेना मुश्किल है। सड़क, बिजली-पानी, कानून-व्यवस्था की स्थिति में एक दिन में सुधार कर लेना संभव नहीं है। इसको लेकर एक मुहिम चलाई जानी चाहिए। इसके लिए हमारी सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। हम सभी कहीं न कहीं अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में चूक रहे हैं। हम अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा तो दे रहे हैं पर उन्हें दुनियादारी नहीं सिखा पा रहे हैं।
डा.सुमन लाल, अध्यक्ष, प्रयास भारती

हक के लिए उठाएं आवाज

गांवों के विकास के बिना सूबे का विकास संभव नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों से आज भी पलायन जारी है। सरकार ने चीनी मिल खोलने का वादा किया था पर आज तक एक भी चीनी का मिल नहीं खुला है। विकास के लिए भूमि सुधार जरुरी है। गरीब के बच्चे भूखे मर रहे हैं और सरकार फ्लोटिंग रेस्तरां में कैबिनेट की बैठक बुलाकर लाखों रुपया पानी में बहा रही है। नरेगा में लूट मची हुई है। इसकी मॉनिटीरिंग करने वाले का कोई नहीं है। पूरी व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है। महिलाएं आज भी घर की दलहीज को पार नहीं कर रही है। महिलाओं को घर से बाहर निकलकर आंदोलन करने की जरूरत है। दूसरे राज्यों की तुलना में बिहार में प्रति व्यक्ति आय भी कम है। ऐसी स्थिति में 2020 तक बिहार कहां पहुंचेगा, कहना मुश्किल है।
अनीता सिंह, ऐवपा नेत्री

ब्यूरोक्रेसी में सुधार की जरूरत

सूबे में सबके लिए सामान्य शिक्षा व्यवस्था लागू करने की जरूरत है। हिंसामुक्त और रोजगार परक स्थिति को पैदा करने के लिए सबको मिल-जुल काम करने की आवश्यकता है। कृषि के क्षेत्र में विकास किये बिना सूबे का विकास संभव नहीं है। लघु कुटीर उद्योग को बढ़ाना होगा। किसानों के हिसाब सरकार को काम करना होगा तभी विकास संभव है। आज भी हर जगह बिहारी को अपमानित किया जा रहा है। सभी नेता इसका सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाते हैं इस समस्या को समाप्त करने की पहल कोई नहीं करता है। ब्यूरोक्रेसी में सुधार की जरूरत है। जब तक इसमें सुधार नहीं होगा, विकास संभव नहीं है। लोगों को खुद के व्यवहार को सुधारना होगा। सबको रोजगार, सबको शिक्षा मिले इसका प्रयास सरकार को करना चाहिए।
अख्तरी बेगम, सामाजिक कार्यकर्ता

संसाधन की है कमी

बिहार में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। सिर्फ यहां संसाधन की कमी है। 15 वर्षो में दूसरे राज्यों का चेहरा बदल गया पर बिहार की तस्वीर बदलने की अभी सिर्फ कोशिश की जा रही है। सरकार लोगों को सिर्फ मुंगेरी लाल के हसीन सपने देखाने में लगी है। सरकार नई-नई योजनाओं का निर्धारण बंद एसी कमरे में करती है। फिर सारी योजनाएं बंद कमरे में ही सिमट कर रह जाती हैं। बिहार को बदलने के लिए सरकार को सच्चे मन से काम करने की जरूरत है। सिर्फ हवा में पुल बांधने से काम  नहीं होने वाला है। सरकारी स्कूलों की स्थिति आज भी बदतर है। शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार की जरूरत है। अगर इसमें सुधार नहीं किया गया तो बिहार और पीछे चला जाएगा।
पुष्पा चोपड़ा अध्यक्ष, बिहार महिला उद्योग संघ

महिलाओं की स्थिति गंभीर

98 फीसदी लोगों का न्याय के साथ विकास नहीं हो रहा है। भूमि सुधार का मसला अहम है। महिला सशक्तीकरण की बातें होती हैं पर महिलाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। सर्विस सेक्टर में उनकी स्थिति बंधुआ मजदूरों जैसी ही हैं। पचास फीसदी आरक्षण के बाद महिलाएं पंचायत प्रतिनिधि तो बन गयीं पर उनकी स्थिति अच्छी नहीं हैं। उनके साथ तरह-तरह की घटनाएं हो रही हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बेहतरी के कोई अधिक प्रयास नहीं हो रहे हैं। अस्पतालों में इलाज आज भी नहीं हो पा रहा है। राज्य में अर्ध सामंती व्यवस्था अभी भी कायम है। सामंती बर्बरता भी देखने को मिल रही है। खासकर महिलाओं पर ज्यादा अत्याचार किया जा रहा है। ऐसे में 2020 का बिहार कहीं से भी सुनहरा नहीं दिख रहा है।
शशि यादव, ऐपवा नेत्री 

माहौल बदलने के लिए करना होगा प्रयास

बिहार के विकास के लिए सभी लोगों में आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है। बिहार का माहौल बदलने के लिए सभी को प्रयास करना होगा। बिहार आज हर क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। लोगों का पलायन आज भी जारी है। बच्चे पढ़ने के लिए कोटा, दिल्ली, मुंबई जा रहे हैं और हमारे राज्य की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो रही है। सफाई से लेकर ट्रैफिक व्यवस्था तक सबकी हालत ध्वस्त है। स्कूल में बच्चे पढ़ने के लिए कम और खिचड़ी खाने के लिए ज्यादा पहुचंते है। बिहार में चारों तरफ स्थिति खराब है। सरकार को इसकी तरफ ध्यान देना चाहिए तभी 2020 में बिहार की सूरत बदल सकती है।
मीरा सुभाषिणी, अखिल भारतीय महिला परिषद

हिन्दुस्तान समागम-2009 के क्रम में हमने पाठकों के विचार आमंत्रित किए हैं। यह स्पष्ट है कि लोग अपने इस बिहार को चमकता हुआ देखना चाहते हैं। हमें सैकड़ों एसएसएस रोज मिल रहे हैं। स्थानाभाव में हम अभी बहुत से अच्छे विचारों को भी नहीं प्रकाशित कर पा रहे हैं, लेकिन लोगों के उत्साह से यह तो तय है ही कि बिहार जरूर बदलेगा। इन विचारों में वह ऊर्जा दिखती है, जो स्वत: ही इस प्रदेश को आगे ले जाएगी। हम पाठकों के इस जज्बे को सलाम करते हैं-जनता की इस आवाज को सलाम करते हैं। जनता के विचारों के आधार पर जो मुद्दे मुख्य रूप से निकलकर आए, उनमें अशिक्षा, जातिवाद, भ्रष्टाचार, जातिवाद, पलायनवादी सोच, बेरोजगारी प्रमुख हैं।

बिहार के विकास के लिए भ्रष्टाचार के साथ अशिक्षा का खात्मा करना होगा। सिर्फ इसी से काम नहीं चलेगा बल्कि इसके लिए राजनीतिक पार्टियों को भी एकजुट होना होगा। -पारस नाथ यादव बक्सर

भ्रष्टाचार ही विकास के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। इस पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए और इसका समाधान तलाशना चाहिए। -अरुण कुमार राय हनुमान नगर, पटना

सूबे के विकास के लिए अशिक्षा, नक्सलवाद, बेरोजगारी को खत्म किया जाना जरूरी है। इतना ही नहीं वोट के उद्देश्य के लिए घृणित राजनीति को भी खत्म करना होगा। -दीपक कर्ण बेगूसराय

बेहतर समाज का निर्माण घर से ही होता है। अगर महिलाएं शिक्षित होंगी तभी अच्छा समाज बनेगा। महिलाओं की शिक्षा बड़ी चुनौती है। -वीणा राजीवनगर, पटना

जब तक जातिवाद का जहर नहीं मिटेगा तब तक विकास की बात बेमानी है। नेता अपनी सियासी रोटी सेंक रहे हैं और जनता इस आग में जल रही है। -अविनाश कुमार गोलू शिवपुरी, हाजीपुर

भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती नक्सली हिंसा होगी। प्रदेश सरकार के पास न तो ताकत न इच्छा शक्ति ही दिख रही है। -जगदीश प्रसाद पानापुर, छपरा

जब तक भूमि सुधार कानून लागू नहीं होता तब तक नक्सली हिंसा जारी रहेगी और यह प्रदेश के विकास को बाधित करती रहेगी। -लड्डू रामगढ़वा, पूर्वी चंपारण

सुधार के लिए नेताओं को अपने अंदर नैतिकता जगानी होगी। उनके द्वारा ही हमारी आवाज विकास के दरवाजे तक पहुंच सकती है। - अनाम

बिहार के विकास की राह में जो बाधक तत्व हैं उनमें भ्रष्टाचार अहम है। पूरी की पूरी व्यवस्था बीमार हो चुकी है। -अजय चिरैंयाटाड़ पुल, पटना

नक्सलवाद की समस्या सबसे गंभीर है। जातिवाद भी समस्या है पर इसका दायरा उतना नहीं जितना नक्सलवाद का है। - अनाम

जरूरी है कि लोग बदलाव की सोचें और सूबे को बेहतर राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत है। क्रांतिकारी कदम उठाने होंगे। -पीयूष खत्री जहानाबाद

जिस दिन जातिवाद खत्म हो जाएगा बिहार एक प्रगतिशील राज्य बन जाएगा। इसका खात्मा जरूरी है। -इम्तयाज अली भुट्टो गोपालगंज

बिहार की राजनीति में गंदगी व्याप्त है जो सूबे के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इसे दूर किया जाना जरूरी है। -अपाम

लोगों में सिविक सेंस जरूरी है। प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर की भी कमी है जिसमें सुधार अपेक्षित है।   -बीएन झा चीफ मैनेजर (पीबीबीयू2), एसबीआई मुख्यालय, पटना

सूर्योदय प्रकृति को नवजीवन देता है तो शिक्षा समाज को रोशनी देता है। इसीलिए पहली जरूरत है कि प्रदेश में अशिक्षा का अंधेरा दूर किया जाए। -अनाम

प्रगति के लिए स्वावलंबन के रास्ते मजबूत किए जाएं। नागरिक-मंत्री और अधिकारी को अपने दायित्वों को समझना चाहिए। -नेमी कुमार नारियल बाजार, मधुबनी

नेतागण अगर अपनी घोषणाओं को ही पूरा कर लें तो काफी है। इसी से प्रदेश के विकास में क्रांति आ जाएगी। ऐसा अगर हो जाए तो बिहार दिल्ली से भी आगे निकल जाएगा। -शंकर आदमपुर भागलपुर

दलगत और जातिगत दायरे से बाहर आकर अगर नेता अपनी सोच को बदलें तो प्रदेश का विकास हो सकता है। -एमके जमुआर पटना

नेताओं को पब्लिक फ्रेंडली होना चाहिए न कि चेयर फ्रेंडली। अगर ऐसा होता है तो विकास को गति मिल सकती है। -प्रियंका सहरसा

सरकार किसानों की बात तो करती है पर यह सब बातें सिर्फ हवा में है। सरकारी दफ्तर में बिना सेवा शुल्क के कोई काम नहीं होता। मैं तो समझ नहीं पाता हूं कि यह कैसा सुशासन है। -उमापति ठाकुर दीवानगंज, कटिहार

सरकार को सोचना चाहिए कि किस तरह बिहार की प्रतिभाओं को यहीं रोका जाए। आखिर क्यों पढ़े लिखे युवा को दिल्ली-मुंबई की ठोकर खानी पड़ती है। -दीपक कुमार झा सैदपुर, भागलपुर

सिर्फ नेताओं को कोसने से बात नहीं बनेगी। आम आदमी को भी तो इसके लिए सोचना होगा। प्रत्येक का नैतिक विकास हो तो सूबा सुंदर बने। -जेएल जायसवाल शेखपुरा

लोगों को स्प्रीचुअलिटी की तरफ मुड़ना चाहिए। अध्यात्मिक पतन की वजह से ही समाज की ऐसी हालत बनी हुई है। -श्रीकांत बिहार थियोसोफिकल फेडरेशन, एनी बेसेंट रोड, पटना

प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा मेरे विचार से युवा बिहारियों का पलायन है। इसे रोका जाना चाहिए। -बृजेश डुमरांव

बिहार तभी बदलेगा जब हम सब खुद को बदलेंगे। बिना इसके अगर हम कुछ खास उम्मीद करते हैं तो यह संभव नहीं है। -अशोक मिश्र आशियाना नगर, पटना

सड़क व बिजली की समस्या गंभीर है। जब तक इनमें सुधार नहीं होगा, तक विकास की बात करनी बेमानी ही होगी। -जयप्रकाश सिंह जमनपुरा, छपरा

यह सही है कि बिहार बदल रहा है। लेकिन अभी रास्ता लंबा है और चुनौतियां बहुत सारी हैं। अशिक्षा, कानून व्यवस्था के अलावा जातिवाद राह में बाधा है। -केके वर्मा बोरिंग रोड, पटना

भविष्य तो बेहतर शिक्षा व्यवस्था से ही बनेगा। हमें सबसे ज्यादा ध्यान शिक्षा का देना हो। -केके श्रीवास्तव जगदेव पथ, पटना

बिहार बेहतर तभी हो सकता है जबकि हम लड़कियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाएं। आज भी शिक्षा की दशा ठीक नहीं है।   -कुक्कू कटिहार

उपलब्ध संसाधनों का बेहतर दोहन कर प्रदेश को आगे ले जाने के लिए हम सबको साथ आना चाहिए। -बीएम कृष्णा ब्रह्मपुरा, मुजफ्फरपुर

आज भी लोगों को न्यूनतम शिक्षा-चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। लोग परेशान हैं पर कोई समाधान नहीं दिखता है। -समर विजय नारायण सिंह कदमकुआं, पटना

सड़कें बदतर हैं। यहां रोजगार के अवसर कम हैं। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई आदि की व्यवस्था को ठीक करना आवश्यक है। -अनिल कुमार सिंह बोरिंग रोड, पटना

गरीबों से आज भी स्वास्थ्य और शिक्षा दूर ही है। कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बदतर है। इन सभी में सुधार जरूरी है, तभी विकास होगा। -विकास आनंद पटेलनगर, पटना

रोजगार के अभाव में बिहार के युवा दूसरे राज्यों में कमाने जाते हैं। सरकार को चाहिए कि वह रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराए, ताकि पलायन रुके। -नवल किशोर सीवान

विकास के लिए सबसे पहली जरूरत है कि नेतृत्व ईमानदार हो और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ इसके लिए काम करे। -रीना शर्मा पटना

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