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न्यूज चैनलों पर नियंत्रण की तैयारी नहीं हैः अंबिका

न्यूज चैनलों पर नियंत्रण की तैयारी नहीं हैः अंबिका

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने रविवार को स्पष्ट तौर पर कहा कि सरकार की मंशा एक ऐसी स्वतंत्रत व्यवस्था बनाने की है, जो प्रसारण क्षेत्र के सभी आयामों को देखेगी।

सरकार के इस इरादे का खुलासा करने के साथ ही उन्होंने यह सफाई भी दी कि ऐसा करके सरकार का इरादा न्यूज चैनलों का नियमन करना नहीं है।

उन्होंने सीएनएन-आईबीएन के कार्यक्रम डेविल्स एडवोकेट में करन थापर के सवालों के जवाब में कहा कि आप यकीन करें या नहीं करें, हम सामग्रियों पर निगरानी के लिए नियामक बनाने नहीं जा रहे हैं, यह सरकार की मंशा हरगिज नहीं है। यह बिना सरकारी नियंत्रण वाली स्वतंत्र स्वायत्त इकाई होगी, जो मंत्रालय से संबंधित सभी मुद्दों को देखेगी।

यह पूछे जाने पर कि जब प्रिंट मीडिया के लिए ऐसी कोई योजना नहीं है तो टेलीविजन न्यूज चैनलों के लिए नियामक स्थापित करने की तैयारी क्यों की जा रही है, अंबिका ने कहा कि हम व्यवस्था बनाने की बात कर रहे हैं। आप इसे नियामक कह सकते हैं। यह सामग्री को नियंत्रित किए जाने के मायने में नियामक नहीं है।

सोनी ने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि उनका मंत्रालय नियामक की भूमिका निभाए। मैं स्पष्ट कर चुकी हूं कि मैं मंत्रालय की ओर से नियंत्रित नहीं करना चाहती हूं, लेकिन किसी ऐसी व्यवस्था से जो स्वायत्त हो। हम समाचार प्रसारक संघों से और प्रसारकों के अन्य संगठनों से बात कर रहे हैं। उन सबके पास अपनी स्व-नियामक व्यवस्थाएं हैं।

उन्होंने कहा, सच्चाई यह है कि विभिन्न प्रसारक इकाइयों ने हमसे कहा है कि मंत्रियों के समूह की कोई ऐसी शीर्ष व्यवस्था बनाई जाए जिससे 'मुंबई आतंकी हमले जैसे' आपात हालात पैदा होने पर संपर्क किया जा सके।

सच का सामना तथा पति पत्नी और वो जैसे टेलीविजन कार्यक्रमों के संदर्भ में मंत्रालय की ओर से नोटिस जारी करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं नहीं समझती हूं कि 'से मामलों में' सरकार अपनी ओर से पहल करती है। मुझे नहीं लगता कि सरकार यह सब करना चाहती है।

उन्होंने कहा, यह सब जनता को तय करने दीजिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा समाज की संवेदनाओं के बीच बेहतर संतुलन बनाने के लिए किस तरह का ढांचा या व्यवस्था बनाई जाए।

मंत्री ने हालांकि, नेहरू-एडविना के रिश्तों को दर्शाने वाली अंग्रेज़ी फिल्म इंडियन समर के बारे में कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने इतना भर कहा कि जो विदेशी फिल्में भारत में शूटिंग करना चाहती हैं उन्हें सरकार के कुछ नियमों का पालन करना होगा और जहां तक फिल्म की पटकथा में बदलाव के सुझाव देने का प्रश्न है, यह भी मौजूदा नियमों के अनुरूप किया गया है।

उन्होंने कहा कि हम भारतीय फिल्मों के निर्माण संबंधी मामलों में दखल नहीं देते हैं। लेकिन जो फिल्में बाहर से आ रही हैं, उन्हें गृह मंत्रालय की ओर से तब तक वीजा आदि की सुविधा नहीं दी जाती है जब तक कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय फिल्म की सामग्री को नहीं देख ले। यह व्यवस्था मेरी बनाई नहीं है। यह बरसों से है। यह पटकथा में पर्वितन का प्रश्न नहीं है, बल्कि जैसा कि मैने पहले कहा, यह संतुलन को बनाने का प्रयास है।

अंबिका ने हालांकि फिल्म की पटकथा के बारे में अपने विचार बताने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, मेरे कोई व्यक्गित विचार नहीं हैं। ऐतिहासिक तथ्य मौजूद हैं।

यह कहे जाने पर कि क्या वह नेहरू और एडविना को उनके सच्चे संबंधों से बचाना चाहती हैं, उन्होंने कहा, मैं आपकी बातों में नहीं आने वाली मैं ऐसी व्यवस्था को जानती हूं जिसमें सिर्फ यही फिल्म प्रभावित नहीं हुई है। पिछले तीन साल में स्लमडॉग मिलियनेयर सहित 97 फिल्मों को भारत में शूटिंग की अनुमति मिली है। मैं इस बारे में इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहती।

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