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ओलंपिक का हिस्सा बन सकती हैं चीयरलीडर्स

ओलंपिक का हिस्सा बन सकती हैं चीयरलीडर्स

भारत में कड़ी आलोचनाएं झेलने वाली चीयरलीडर्स भारतीयों के लिए भले ही नई हों, लेकिन अमेरिका में इनका इतिहास लगभग 120 साल पुराना है जहां अब चीयरलीडिंग को खेल के तौर पर ओलंपिक में शामिल करने की मांग भी की जाने लगी है।

भारत के लोग चीयरलीडिंग से इंडियन प्रीमियर लीग के अस्तित्व में आने के बाद परिचित हुए। जब पहले आईपीएल में चीयरलीडर्स कम वस्त्रों में क्रिकेट मैदान के किसी कोने पर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए उतरी तो बवाल मच गया। इसे फूहड़पन और भारतीय संस्कृति के खिलाफ माना गया और यहां तक कि मामला संसद तक भी पहुंचा।

लेकिन चीयरलीडिंग अमेरिका या यूरोपीय देशों के लिए नया नहीं है और अब तो यह चीन और जापान जैसे एशियाई देशों में भी अपनी जड़ें जमा चुका है। यही वजह है कि अमेरिका के यूनिवर्सल चीयरलीडिंग एसोसिएशन (यूसीए) ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से इसे खेल के तौर पर ओलंपिक में शामिल करने की मांग की है।

चैंपियंस लीग टी-20 टूर्नामेंट में भाग ले रही अमेरिका की 14 चीयरलीडर्स की कप्तान क्रिस्टीना जेकास भी यूसीए से जुड़ी हैं। जेकास ने कहा कि भारतीयों के लिये चीयरलीडिंग नया है लेकिन अमेरिका में इसका पुराना इतिहास है। वहां इसकी एसोसिएशन हैं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं होती हैं। यूसीए ने चीयरलीडिंग को ओलंपिक में शामिल करने के लिए भी आईओसी को पत्र लिखा है।

अमेरिका में चीयरलीडिंग का इतिहास 1890 से शुरू होता है जब पहली बार प्रिंसटन यूनिवर्सिटी फुटबॉल मैचों में चीयरलीडर्स को लाया गया। पहले इसमें पुरुष अधिक भाग लेते थे लेकिन दूसरे विश्व युद्ध से महिलाओं को अधिक महत्व दिया जाने लगा और 1948 में अमेरिका में लारेंस 'हर्की' हरकीमर ने राष्ट्रीय चीयरलीडिंग एसोसिएशन का गठन किया। अमेरिकी चीयरलीडर्स की पत्रिका की शुरुआत 1994 में हुई और 2002 तक इसका प्रसार दो लाख और पाठक दस लाख हो गए थे।

अमेरिका में आज 35 लाख से ज्यादा चीयरलीडर्स हैं। यह भारतीयों के लिए बहस का मुद्दा हो सकता है कि चीयरलीडिंग खेल है या नहीं लेकिन अमेरिका के 20 से अधिक प्रांतों के हाईस्कूल संगठन इसे खेल मानते हैं। वहां चीयरलीडर्स के लिए खिलाड़ियों की तरह शिविर लगते हैं और उनके भी कोच होते हैं। अमेरिका में स्कूल स्तर के अलावा ऑल स्टार नेशनल्स और कॉलेज नेशनल्स होते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीयरलीडिंग की इंटरनेशनल ऑल लेवल कंपीटीशन और विश्व कप तक आयोजित किए जाने लगे हैं।
    
क्रिस्टीना ने कहा कि चीयरलीडिंग सिर्फ डांस तक सीमित नहीं है। यह जिम्नास्ट का ही एक दूसरा रूप है जिसमें काफी एक्रोबिटस होती है। अमेरिका से बढ़कर अब चीयरलीडिंग विश्व के अन्य देशों में भी पांव पसार रहा है। ब्रिटेन में यह लोकप्रिय होता जा रहा है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, कोलंबिया, फ्रांस, जापान, हॉलैंड, न्यूजीलैंड आदि देशों में इसकी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाने लगी हैं।

 

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