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मुंगेर में वैध से अधिक बन रहे हैं अवैध हथियार

मुंगेर में वैध से अधिक बन रहे हैं अवैध हथियार

देश में बंदूक निर्माण के लिए चर्चित बिहार के मुंगेर जिले में इन दिनों अवैध हथियार का कारोबार जोरों पर है। जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष अब तक पुलिस ने यहां 48 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का भंडा—फोड़ कर इस संबंध में 90 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधीक्षक एम सुनील नायक ने बताया कि इस वर्ष अवैध हथियार निर्माण के विरुद्ध जारी विशेष अभियान में 48 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों को पकड़ा जा चुका है। भारी संख्या में पूर्ण निर्मित और अर्धनिर्मित हथियार और उन्हें बनाने वाले उपकरण और मशीन बरामद किए गए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष जनवरी से लेकर अबतक की गयी छापामारी ने कुल 45 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं जिनसे पूर्ण निर्मित 65 पिस्तौल और 170 अतिरक्त मैगजीन के साथ भारी मात्र में कारतूस बरामद किये जा चुके हैं।

नायक ने बताया कि मुंगेर के शादीपुर एवं दिलावरपुर मुहल्ला में सील की गयी दो दुकानों से पुलिस ने पिस्तौल बनाने के रेडीमेड बैरल, कोकपीस, ट्रिगर गार्ड फ्रेम, ब्रीच ब्लाक, ट्रिगर मैकेनिज्म सहित अन्य उपकरण भारी मात्र में बरामद किए। उन्होंने बताया कि इन दुकानों से पुलिस ने हथियार के भी उपकरण बरामद किए। उससे करीब 20 हजार पिस्तौल और कारबाईन का निर्माण किया जा सकता था।

मुंगेर में देश में सबसे अधिक कुल छत्तीस छोटे हथियार के सरकारी लाइसेंसशुदा कारखाने और 13 लाइसेंसी बंदूक की दुकानें हैं। 25 ऐसी दुकानों के मामले सामने आए हैं जिनके लाईसेंस प्रशासन ने रद्द कर दिए थे। ये मामले न्यायालय में लंबित है।

मुंगेर के हथियार कारखानों में 12 बोर की बीएल शॉटगन परम्परागत डिजायन कोडेक्स अटलांटस पर आधारित है। इन कारखानों में प्रत्येक वर्ष करीब 12 हजार बंदूकें बनती हैं जिनकी आपूर्ति देश—विदेश में होती है। बताया जाता है कि मुंगेर में वैध हथियार बनाने के कारखानों से अधिक अवैध हथियार बनाने के कारखाने हैं और इनकी संख्या सैकडों में है। यहां अवैध हथियार बनाने वाले कारीगरों को भले ही विश्व के अन्य रक्षा संस्थानों के करीगरों के मुकाबले मेटलर्जी एवं रायफलिंग के फामरूले का उतना बेहतर ग्यान नहीं है फिर भी वे आधुनिकतम तकनीक से लैस हैं।

मुंगेर जिले में प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत ऋण लेकर कई बेरोजगार युवकों ने लेथ और मिलिंग मशीन लगा रखी है और बताया जाता है कि उनके द्वारा इन मशीनों का इस्तेमाल अवैध हथियारों के निर्माण में किया जा रहा है और इनमें से कुछ युवक अवैध हथियार निर्माण करते हुये पकडे भी गये हैं।

मुंगेर के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस वर्ष पुलिस द्वारा हथियार बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली चौदह लेथ मशीन जब्त की गयीं जिसके बारे में यह जांच की जा रही है कि ये मशीन किसी सरकारी योजना के अंतर्गत ऋण लेकर लगायी गयी थी की नहीं। एक अनुमान के मुताबिक मुंगेर में अवैघ हथियार का सालाना कारोबार लगभग 20 करोड़ रुपए का है।

जिले की वैध हथियार मंडी यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह सरकार को करीब पांच करोड़ रुपया का सालाना कर के तौर पर देती है। लेकिन इस क्षेत्र में यहां के अवैध धंधे का अंदाजा यहां की पुलिस द्वारा पिछले चार सालों के दौरान जब्त अवैध हथियारों से ही लगाया जा सकता है।

वर्ष 2005 में 17 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का पता लगाया गया जिनमें बरामद अवैध हथियारों में 73 पिस्तौलें 6 राइफलें और 416 कारतूस शामिल हैं।

इसी तरह वर्ष 2006 में मुंगेर पुलिस ने जिले में 14 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का भंडाफोड किया और एक ए के  47, 81 पिस्तौल, 11 मैगजीन, 19 राइफल, राइफल की 1 मैगजीन, तीन बन्दूक, पांच कार्बाइन, 2158 कारतूस और दस डेटोनेटर बरामद किये।

वर्ष 2008 में मुंगेर पुलिस ने 20 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का पता लगाया और 53 पिस्तौलें दो राइफलें चार शाट गन, 22 पिस्तौल, 22 पिस्तौल की मैगजीन, एक ग्रेनेड और 224 जिंदा कारतूस बरामद किये।

वर्ष 2007 में ही दक्षिण भारत की पुलिस अपने यहां पकडे गये हथियारों की खेप की जांच के दौरान मुंगेर के एक बाहुबली नेता को गिरफ्तार कर ले गयी थी।

मुंगेर में निर्मित स्टेनगनें और पिस्तौल हावडा के रास्ते बांग्लादेश भेजे जाने की भी सूचना है। हावड़ा पुलिस ने अवैध हथियारों की एक खेप के साथ गत वर्ष मुंगेर के एक तस्कर को गिरफ्तार किया था जिसकी जांच के लिए बाद में पश्चिम बंगाल की पुलिस टीम मुंगेर भी आयी थी।

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