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सबके साथ दिवाली

यह एक रूढ़ मान्यता है कि भारतीय विचार में वैराग्य और अध्यात्म का केंद्रीय स्थान है, और भौतिक क्षेत्रों में पिछड़ने का भी यही कारण है। इस बात का तार्किक या वैचारिक पक्ष जो भी हो, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि शायद भारतीय संस्कृति दुनिया में अकेली ऐसी बड़ी संस्कृति है, जिसका सबसे बड़ा उत्सव लक्ष्मी यानी धन की अधिष्ठात्री देवी से जुड़ा है।

चारों पुरुषार्थो में अर्थ का भी स्थान है और परंपरागत भारतीय अर्थव्यवस्था में वर्ष की शुरुआत भी दिवाली से होती है। लेकिन लक्ष्मी को हमने प्रकाश और सफाई से जोड़ा है, यानी विवेक और शुचिता से, और सुविधाजनक ढंग से इन दोनों तत्वों को भुला भी दिया है। इस साल की दिवाली एक नई उम्मीद लेकर तो आई ही है। अर्थव्यवस्था बेहतरी की ओर अग्रसर है, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा है, विदेशी निवेश 41 प्रतिशत बढ़ा है, जो और तेजी से बढ़ेगा क्योंकि पश्चिम में खासकर अमेरिका में सरकार के पैकेजों की वजह से नकदी तो बहुत है, लेकिन उस पर मुनाफा उतना नहीं है।

रोजगार की स्थितियां बेहतर हुई हैं और देर से हुई बारिश से रबी की फसल बेहतर होने का विश्वास जगा है। लेकिन इस आर्थिक मंदी और उससे उबरने की प्रक्रिया ने फिर उसी परंपरागत समझ को बल दिया है कि विकास स्थायी और कल्याणकारी तभी हो सकता है, जब वह विवेक और शुचिता के साथ हो। कुछ सबक तो पिछले साल से सीखने ही चाहिए। एक, लालच थोड़ी दूरी तक तो ज्यादा फायदा देता है, लेकिन आखिरकार वह डुबाता है। दूसरे, अर्थव्यवस्था की नहरों को साफ-सुथरा रखना जरूरी है, वरना उनमें कचरा फंस कर अर्थव्यवस्था का प्रवाह रोक देता है।
   
आज दुनिया का सबसे शक्तिशाली और धनवान देश अमेरिका हवाला और काले धन के सुरक्षित स्थानों को नष्ट करने को प्राथमिकता दे रहा है। हमारे देश में गैरकानूनी धन से पैदा होने वाले खतरों के बारे में कोई खास जागरुकता नहीं दिखती, लेकिन यह सबक हमें सीखना होगा। हम समझदारी दिखाते हैं या ठोकर खाकर सीखते हैं, यह हम पर है। एक बड़ा सबक पिछले दिनों यह सीखा गया कि गरीब और कमजोर तबकों की स्थिति बेहतर करना सिर्फ परोपकार नहीं है, वे लोग अर्थव्यवस्था को भी कीचड़ से निकालने की ताकत बन सकते हैं। विकास के फल सब तक पहुँचे, यह इसलिए जरूरी है कि विकास की गति लगातार बढ़ती रही, यह समाज के ऊँचे तबकों के भी हित में है। ये सारी बातें दिवाली से जुड़े दर्शन में हैं, लेकिन जरूरी है कि इन्हें फिर दोहराया जाए।

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