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पोर्टफोलियो में जोखिम

ज्यादातर निवेशक बाजार में होने वाली उथल-पुथल से परेशान रहते हैं। निवेशक हमेशा  लांग टर्म या फिर अपने निवेश में इक्विटी का अनुपात कम करने को ध्यान में रखकर ही निवेश करते हैं। पोर्टफोलियो बनाते वक्त एक बैलेंस एप्रोच रखना काफी जरूरी है ताकि आपके द्वारा किया गया निवेश फायदेमंद साबित हो सके। किसी की जोखिम लेने की क्षमता उसकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती है।

उदाहरण के लिए एक व्यक्ति ने प्रॉपर्टी खरीदने के लिए होम लोन ले रखा है। ऐसे में अमुक व्यक्ति के लिए इक्विटी में निवेश करना मुश्किल होगा भले ही उसका बैंक बैलेंस बेहतर क्यों न हो। सीधे तौर पर कहा जाए तो न ही लिक्विडिटी और न ही आय किसी की जोखिम लेने की क्षमता के बारे में बता सकती है। यह कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे कि व्यक्ति के लक्ष्य, उम्र, कैश फ्लो आदि। आपके लिए बेहतर होगा कि आप मीडियम रिस्क वाला पोर्टफोलियो बनाएं। इस लिहाज से जरूरी है कि पहले आप ये सुनिश्चित करें कि आपको इक्विटी में कितना निवेश करना है, डेट और कैपिटल प्रोटेक्शन कैटेगरी में कितनी सीमा रखनी है। इसके अलावा कौन सी कैटेगरी के प्रोडक्ट को शामिल करना है।

जहां तक इक्विटी में निवेश की बात है तो लार्ज कैप स्टॉक में निवेश ज्यादा करें क्योंकि ये लंबे समय तक बेहतर रिटर्न देने के साथ तरलता भी प्रदान करते हैं। इक्विटी में आपके पास एक विकल्प है। आप बैलेंस फंड, इंडेक्स फंड और मंथली इन्कम प्लान का कंबीनेशन बना सकते हैं। चूंकि इन फंड का डेट में एक्सपोजर ज्यादा होता है इसलिए गिरते हुए बाजार में ये भी बढ़िया प्रदर्शन करते हैं।

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