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तो दफ्तर लगे अच्छा

इसमें कोई दोराय नहीं कि हर शख्स की कामकाजी जिंदगी के सबसे ज्यादा व्यस्त घंटे उसके ऑफिस में ही बीतते हैं। इसलिए अपने व्यवहार को ऐसा रखें कि अपना ऑफिस हमें  उबाऊ, तनावपूर्ण, जुल्मी और मुसीबत न लगे, और हम वाकई वहां बिताए वक्त को एंजॉय कर सकें। इससे हमें दफ्तर अपना दूसरा घर ही लगने लगेगा। इसका सबसे कारगर मंत्र है अपने सहकर्मियों और मैनेजरों के साथ मैत्री और सहयोगपूर्ण व्यवहार। इसके गोल्डन रूल्स-

- जरूरी नहीं कि ऑफिस में हर शख्स आपका पक्का दोस्त ही हो, लेकिन पेशेवर मर्यादा और शिष्टाचार की खातिर अपने साथियों के साथ विनम्रता, सभ्यता और मधुरता से पेश आएं। 

- अपने काम को लेकर वक्त के पाबंद रहें। ये उम्मीद न करें कि शाम को जब तक आप अपना काम पूरा करेंगे, तब तक कोई सहकर्मी आपके करीब बैठकर सब्र से इंतजार करता रहेगा। 

- अपने वर्कस्टेशन को हमेशा साफ-सुथरा रखें। आपकी सीट के आसपास माहौल अस्त-व्यस्त रहेगा, तो ये किसी को भी अच्छा नहीं लगेगा। वॉशरूम में भी इस नियम का पालन करें।

- ऑफिस में किसी भी सहकर्मी के सामान को न छुएं, और न ही ऑफिस प्रॉपर्टी की बेकद्री करें। कुछ उधार लें, तो समय पर लौटाना न भूलें-खासकर पैसे के मामले में।

- कभी भी ओछी हरकत न करें। विदाई पार्टी, बर्थडे और पूल कलेक्शन में अपना हिस्सा जरूर दें।

- टीम मीटिंग्स में जरूर जाएं और अपनी राय भी रखें। हर प्रोजेक्ट पर अमल में पूरी मदद करें। अगर आप टीम लीडर हैं, तो मेंबर्स की आपस में तुलना और किसी से पक्षपात न करें।

- अगर मकसद आपको नीचा दिखाना न हो, तो आलोचना को सीधे में ही लें। किसी के बारे में व्यक्तिगत गुप्त जानकारी हो, तो कभी उसका प्रचार न करें। किसी पर दोष मढ़ने के बजाय अपने काम की जिम्मेदारी लें। किसी की चमचागीरी न करें।

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